अदालत ने रिश्वत केस में केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: केरल हाई कोर्ट ने शुक्रवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रिपोर्ट के आधार पर कोचीन मिनरल्स एंड रटाइल लिमिटेड (CMRL) रिश्वत मामले में केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन, उनकी बेटी और उनके दामाद के खिलाफ FIR दर्ज करने की याचिका को मंज़ूरी दे दी।
पूर्व मुख्यमंत्री के अलावा, कोर्ट ने उनकी बेटी वीना टी और उनके दामाद पीए मोहम्मद रियास के खिलाफ भी FIR दर्ज करने का निर्देश दिया है। ED के अनुसार, CMRL ने “IT कंसल्टेंसी सेवाओं” के नाम पर वीना की अब बंद हो चुकी कंपनी, एक्सलॉजिक सॉल्यूशंस को 2.78 करोड़ रुपये का धोखाधड़ी वाला भुगतान किया था।
विस्तृत आदेश का इंतज़ार है। आदेश सुनाते हुए कोर्ट ने कहा: “रिट याचिका मंज़ूर की जाती है; FIR दर्ज करने का निर्देश दिया जाता है।”
जस्टिस ए बदरुद्दीन ने एक्टिविस्ट-वकील केएम शाहजहाँ द्वारा दायर याचिका पर यह आदेश जारी किया। शाहजहाँ ने भ्रष्टाचार का मामला तुरंत दर्ज करने के बजाय क्राइम ब्रांच की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) से शुरुआती जांच कराने के राज्य सरकार के फैसले को चुनौती दी थी। शाहजहाँ के अनुसार, ED की सिफारिश को विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो के निदेशक को भेजने के बजाय, राज्य सरकार ने मामले की शुरुआती पुलिस जांच का आदेश जारी कर दिया।
राज्य सरकार ने तर्क दिया था कि शुरुआती जांच के बाद ही FIR दर्ज की जा सकती है। हालाँकि, प्रवर्तन निदेशालय ने कहा कि राज्य पुलिस को FIR दर्ज करनी चाहिए और जांच करनी चाहिए। ED ने अपनी जांच के दौरान सामने आए कथित अपराधों के बारे में राज्य पुलिस प्रमुख के साथ जानकारी साझा की थी। ED की जांच में कुछ ऐसे लेन-देन का पता चला, जिनसे एजेंसी के अनुसार, एक ऐसा अपराध (प्रेडिकेट ऑफेंस) सामने आया जिसकी जांच राज्य पुलिस या VACB द्वारा किए जाने की आवश्यकता थी।
ED के वकील ने बताया कि PMLA के तहत एक निर्धारित अपराध से संबंधित जांच के दौरान, ED को ऐसे सबूत मिले जिनसे पता चलता है कि कोई ऐसा अपराध हुआ है जिस पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के प्रावधान लागू हो सकते हैं।
ED ने कहा कि PMLA की धारा 66(2) और ललिता कुमारी मामले में सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के मुताबिक, अगर जानकारी से किसी संज्ञेय अपराध (cognisable offence) का पता चलता है, तो FIR दर्ज करना ज़रूरी है। ED ने तर्क दिया कि इस मामले में शुरुआती जांच की ज़रूरत नहीं थी और FIR दर्ज करना ज़रूरी था।
