डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ एक और सैन्य अभियान की दी चेतावनी
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि वाशिंगटन ईरान के खिलाफ एक और सैन्य अभियान शुरू कर सकता है। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब युद्ध को आठ महीने पूरे होने वाले हैं और ईंधन की बढ़ती कीमतें अमेरिकी मध्यावधि चुनावों (मिडटर्म इलेक्शन) पर असर डाल रही हैं।
यह चेतावनी उन खबरों के कुछ घंटों बाद आई, जिनमें कहा गया था कि अगर वाशिंगटन और तेल अवीव अपना सैन्य अभियान फिर से शुरू करते हैं, तो तेहरान खाड़ी में समुद्र के नीचे बिछी संचार केबलों को निशाना बनाने की तैयारी कर रहा है।
फ्लोरिडा में एक रैली के दौरान ट्रंप ने कहा, “हम एक और छोटा ‘एपिक फ्यूरी’ (Epic Fury) अभियान चला सकते हैं।” उन्होंने ‘एपिक फ्यूरी’ नाम का जिक्र किया, जो अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ अपने उस युद्ध को दिया था, जिसकी शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी।
तेहरान के किसी समझौते पर पहुंचने की इच्छा पर संदेह जताते हुए ट्रंप ने कहा, “अगर वे समझदार हैं, तो वे बस इतना कहेंगे कि ‘चलिए काम की बात करते हैं।’ लेकिन मुझे शक है कि वे ऐसा करेंगे, क्योंकि शायद वे समझदार नहीं हैं।”
ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब युद्ध कब तक चलेगा इसे लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, ईंधन की कीमतें बढ़ रही हैं, और किसी भी नए तनाव के आर्थिक और क्षेत्रीय परिणामों को लेकर चिंताएं हैं। ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हमलों और लेबनान पर इजरायली हमलों में हजारों लोग मारे गए हैं और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं।
शुक्रवार को इससे पहले, ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इस युद्ध को जल्दी खत्म कर सकता है, लेकिन उन्होंने सवाल उठाया कि क्या वाशिंगटन को इसे तुरंत खत्म करने की कोशिश करनी चाहिए या फिर संघर्ष को धीरे-धीरे कमजोर होने देना चाहिए।
व्हाइट हाउस के साउथ लॉन में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा, “हम इसे बहुत जल्दी खत्म कर सकते हैं। सवाल यह है कि क्या हम इसे खत्म करना चाहते हैं या इसे अपने आप कमजोर होने देना चाहते हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) से तेल की आवाजाही जारी है, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। उन्होंने कहा, “हमें वह सब मिल रहा है जो हम चाहते हैं।”
ट्रंप ने इस संघर्ष को लेकर अलग-अलग लक्ष्य और समय-सीमाएं बताई हैं। इस महीने की शुरुआत में, उन्होंने कहा था कि अमेरिका अगले महीने होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले ईरान पर हमला नहीं करेगा। इन चुनावों में कांग्रेस (अमेरिकी संसद) पर नियंत्रण दांव पर लगा है। ये टिप्पणियां ऐसे समय में आईं जब खबरें थीं कि वाशिंगटन और तेहरान युद्ध को खत्म करने के लिए बातचीत कर रहे हैं।
बुधवार को ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ की एक रिपोर्ट में कहा गया कि अमेरिकी और इजरायली सेनाओं ने मध्यावधि चुनावों के बाद नए सिरे से हमले करने की योजना तैयार कर ली है। अमेरिकी अधिकारियों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में बताया गया कि संभावित लक्ष्यों में ईरान का ऊर्जा बुनियादी ढांचा, परमाणु सुविधाएं, और मिसाइल व ड्रोन जखीरा शामिल हो सकते हैं। शुक्रवार को कई देशों के विदेश मंत्रियों ने चेतावनी दी कि ईरान के खिलाफ एक और सैन्य हमला संघर्ष को बढ़ा सकता है और इसके गंभीर आर्थिक परिणाम हो सकते हैं।
ईरान समुद्र के नीचे बिछी केबलों बना सकता है निशाना
ईरान के दो वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों ने रॉयटर्स को बताया कि जैसे-जैसे फिर से सैन्य कार्रवाई का डर बढ़ रहा है, तेहरान ने खाड़ी क्षेत्र में समुद्र के नीचे बिछी संचार केबलों को निशाना बनाने की विस्तृत योजना तैयार कर ली है। ऐसा तब किया जाएगा, यदि अमेरिका और इज़राइल फिर से ईरान पर हमला करते हैं।
अपनी पहचान गुप्त रखने की शर्त पर बात करने वाले इन अधिकारियों ने इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी कि ईरान ऐसे हमले कैसे या कहाँ कर सकता है। एक अधिकारी ने बताया कि तेहरान का मकसद केबल कटने के बाद उनकी मरम्मत को रोकना होगा, जिससे इंटरनेट कनेक्शन और अन्य संचार सेवाओं में रुकावटें लंबे समय तक बनी रहेंगी।
एक अधिकारी ने चेतावनी देते हुए कहा, “अगर ईरान पर हमला होता है, तो फिर कोई ‘रेड लाइन’ (सीमा) नहीं बचेगी… समुद्र के नीचे बिछी केबलों से लेकर सैन्य ठिकानों तक, यहाँ तक कि गुप्त ठिकानों को भी निशाना बनाया जाएगा।” उन्होंने वाशिंगटन को “आग से न खेलने” की चेतावनी दी। अधिकारी ने दावा किया कि ईरान की इन केबलों तक पूरी पहुँच है और वह इन्हें नष्ट कर सकता है।
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के राजनीतिक मामलों के उप-प्रमुख यादुल्लाह जवानी ने बुधवार को कहा कि अगर ईरानी बुनियादी ढांचे पर हमला होता है, तो ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) के नीचे मौजूद सात प्रमुख इंटरनेट केबलों को निशाना बना सकता है। इन धमकियों से ईरान के नेतृत्व की यह चिंता झलकती है कि अगर अमेरिका कोई नया सैन्य अभियान शुरू करता है, तो उसका जवाब पिछली बार की तुलना में कहीं अधिक कड़ा होना चाहिए।
