“कई अनधिकृत डेबिट”: ग्रेटर नोएडा PNB धोखाधड़ी मामले में CBI केस

चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: CBI ने उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की एक शाखा में, बचत और फिक्स्ड डिपॉजिट खाताधारकों के करोड़ों रुपये की हेराफेरी के मामले में केस दर्ज किया है।
केंद्रीय जांच एजेंसी के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (गाजियाबाद) ने गुरुवार को FIR दर्ज की। यह कार्रवाई 23 अक्टूबर को PNB के नोएडा सर्कल के मुख्य प्रबंधक द्वारा दी गई एक लिखित शिकायत के आधार पर की गई है, जिसमें ‘सेक्टर Pi’ शाखा के एक कर्मचारी और कुछ अन्य खाताधारकों को आरोपी बनाया गया है।
CBI ने शाखा की ऑफिस असिस्टेंट दीपांशी, एक खाताधारक आशुतोष पाठक और कुछ अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया है। इन पर BNS (भारतीय न्याय संहिता) की विभिन्न धाराओं के तहत आपराधिक साजिश, विश्वासघात, धोखाधड़ी, खातों में हेरफेर और लोक सेवकों द्वारा आपराधिक कदाचार जैसे आरोप लगाए गए हैं।
FIR में ‘भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम’ (Prevention of Corruption Act) और ‘सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम’ की धाराएं भी शामिल हैं।
PNB ने अपनी शिकायत में बताया है कि यह धोखाधड़ी तब सामने आई, जब 16 सितंबर को एक खाताधारक ने अपने खाते में हुए तीन संदिग्ध डेबिट ट्रांजेक्शन के बारे में शाखा प्रमुख से संपर्क किया।
बैंक के अनुसार, अब तक ग्राहकों के खातों से 10.24 करोड़ रुपये की “अनधिकृत” (बिना अनुमति के) निकासी का पता चला है। आरोप है कि आरोपियों ने पिछले तीन वर्षों में यह रकम निकाली है। PNB की शिकायत में कहा गया है कि शाखा में खातों का मिलान (reconciliation) किया जा रहा है, ताकि धोखाधड़ी की गई सटीक रकम का पता लगाया जा सके।
गुरुवार को PNB ने ग्राहकों को भरोसा दिलाया कि सभी वैध दावों का निपटारा किया जाएगा। बैंक ने बताया कि शाखा में 43 लाख रुपये के तीन दावों का निपटारा पहले ही किया जा चुका है। बैंक ने कहा कि वह संबंधित अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग कर रहा है और प्रभावित ग्राहकों की चिंताओं को दूर करने के लिए जरूरी कदम उठा रहा है।
CBI को भेजी गई शिकायत में बैंक ने बताया है कि जब शाखा प्रमुख ने दीपांशी से इन संदिग्ध ट्रांजेक्शन के बारे में पूछताछ की, तो वह “रो पड़ी और उसने कबूल किया कि ये ट्रांजेक्शन एक खाताधारक, आशुतोष पाठक के कहने पर किए गए थे… जो उसे जानता है।” CBI की FIR में शामिल PNB की शिकायत में कहा गया है, “सिस्टम लॉग, यूज़र एक्टिविटी रिकॉर्ड और ट्रांजेक्शन की शुरुआती जांच से पता चला है कि दीपांशी ने अलग-अलग ब्रांच अधिकारियों की CBS (कोर बैंकिंग सॉल्यूशन) यूज़र ID का गलत इस्तेमाल करके, काफी लंबे समय तक ग्राहकों के खातों से कई अनधिकृत (बिना अनुमति वाले) ट्रांजेक्शन किए।”
शुरुआती जांच से पता चलता है कि बैंकिंग क्रेडेंशियल्स का अनधिकृत इस्तेमाल किया गया, ग्राहकों के खातों की जानकारी में हेरफेर की गई, ग्राहकों के फंड को दूसरी जगह भेजा गया, FDR (फिक्स्ड डिपॉजिट रिसिप्ट) के विवरण में बदलाव किए गए, FDR को समय से पहले बंद कर दिया गया और पैसों को लाभार्थी खातों (बेनिफिशियरी अकाउंट्स) के जरिए ट्रांसफर किया गया।
नोएडा पुलिस ने भी इस मामले में एक FIR दर्ज की है।
