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डेरी और GM उत्पादों की एंट्री नहीं: पीयूष गोयल ने भारत के व्यापार समझौतों में ‘रेड लाइन’ तय की

The country always stands with you: Piyush Goyal tells the Indian community in the US.चिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को कहा कि भारत ने किसी भी मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के तहत अपने डेयरी क्षेत्र को विदेशी कंपनियों के लिए कभी नहीं खोला है और न ही वह जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) उत्पादों के आयात की अनुमति देगा। उन्होंने इन दोनों मुद्दों को देश के लिए बेहद संवेदनशील बताया और कहा कि सरकार व्यापार समझौतों में किसानों, मछुआरों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) के हितों की रक्षा करना जारी रखेगी।

दिल्ली के किरोड़ीमल कॉलेज में छात्रों को संबोधित करते हुए, गोयल ने कहा कि व्यापार समझौतों पर बातचीत करते समय भारत ने संवेदनशील क्षेत्रों के मामले में “कभी भी” कोई समझौता नहीं किया है।

“हम कुछ कृषि उत्पादों और समुद्री उत्पादों जैसी उन वस्तुओं के मामले में बहुत संवेदनशील हैं, जिनमें हमारी स्थिति काफी मजबूत है। हम अपने डेयरी क्षेत्र को खोलने को लेकर भी बहुत संवेदनशील हैं। असल में, हमने आज तक किसी के लिए भी अपना डेयरी क्षेत्र नहीं खोला है।
“हम इस बात को लेकर भी बहुत संवेदनशील हैं कि भारत में कोई भी GM उत्पाद न आए; हमने कभी इसकी अनुमति नहीं दी है और भविष्य में भी कभी नहीं देंगे। हम अपनी धार्मिक भावनाओं को लेकर भी संवेदनशील हैं। कई विदेशी देशों में, डेयरी उत्पादों को बनाने के लिए बछड़े के मांस या ‘रेनेट’ (rennet) का इस्तेमाल किया जाता है। हम भारत में इसकी अनुमति नहीं देते हैं।” उन्होंने व्यापार समझौतों से जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए कहा, “इसे सख्ती से प्रमाणित किया जाना चाहिए… ताकि भारत के एक बड़े हिस्से की धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुंचे।”

रेनेट (Rennet) एक एंजाइम है, जो पारंपरिक रूप से छोटे बछड़ों के पेट की परत से प्राप्त किया जाता है और इसका इस्तेमाल पनीर बनाने में होता है।

गोयल ने कहा कि भारत का ध्यान व्यापार समझौतों के जरिए किसानों, MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों) और अन्य घरेलू उत्पादकों के लिए नए अवसर पैदा करने पर है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां देश प्रतिस्पर्धी स्थिति में है।

मंत्री ने कहा, “हमारी कोशिश नए अवसर और रोजगार के नए मौके पैदा करने की है। हम उन क्षेत्रों में नए अवसर तलाश रहे हैं जहां हम प्रतिस्पर्धी हैं, ताकि भारत के एक बड़े हिस्से, हमारे MSME और हमारे किसानों को इसका बड़ा फायदा मिल सके।”

यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत अमेरिका सहित कई देशों के साथ व्यापार समझौतों पर बातचीत कर रहा है। इन चर्चाओं में डेयरी और GM (जेनेटिकली मॉडिफाइड) उत्पाद संवेदनशील मुद्दे बने हुए हैं, क्योंकि इनमें किसानों के हित, खाद्य सुरक्षा, पर्यावरण संबंधी चिंताएं और धार्मिक भावनाएं शामिल हैं।

गोयल ने कहा कि भारत कपड़ा, फार्मास्यूटिकल्स, कृषि उत्पादों और रत्न एवं आभूषण जैसे क्षेत्रों के लिए बेहतर बाजार पहुंच (market access) हासिल करने की कोशिश कर रहा है।

उन्होंने बताया कि सरकार चाहती है कि विदेशी बाजारों में भारतीय सामानों पर लगने वाला आयात शुल्क (import duty), इंडोनेशिया, मलेशिया, वियतनाम, चीन और फिलीपींस जैसे प्रतिस्पर्धी देशों के उत्पादों की तुलना में कम हो।

उन्होंने कहा, “ये हमारे प्रमुख हित हैं, जहां हम तरजीही बाजार पहुंच (preferential market access) पाने के लिए काम कर रहे हैं। हमारा लक्ष्य यह है कि भारत से जाने वाले सामानों पर लगने वाला शुल्क, इंडोनेशिया, मलेशिया, वियतनाम, चीन और फिलीपींस जैसे प्रतिस्पर्धी देशों के सामानों पर लगने वाले शुल्क से कम हो।” उन्होंने आगे कहा, “हमारी कोशिश यह है कि अपने प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले भारत को तरजीही दरें मिल सकें।”

मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार विनिर्माण (manufacturing) को बढ़ावा देने और रोजगार के अधिक अवसर पैदा करने के लिए काम कर रही है। उन्होंने छात्रों से करियर के विकल्प के रूप में उद्यमिता (entrepreneurship) और स्टार्टअप्स पर विचार करने का आग्रह किया, और बताया कि इन क्षेत्रों में नए अवसर सामने आ रहे हैं।

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