दिल्ली यूनिवर्सिटी के निगमीकरण का AADTA ने किया कड़ा विरोध
चिरौरी न्यूज़
नई दिल्ली: दिल्ली यूनिवर्सिटी के निगमीकरण का पुरजोर विरोध करते हुए, AADTA ने कहा है कि इसे केवल दो अधिकारियों –कुलपति और रजिस्ट्रार- ने इसे “परस्पर शेयर होल्डिंग वाली एक सीमित कंपनी के रूप में परिवर्तित कर दिया है”।
एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए AADTA ने कहा कि वह इसका विरोध हर मंच पर करती आ रही है।
“कार्यकारिणी परिषद की पिछली बैठक के दौरान, जब इस मुद्दे को रिपोर्टिंग आइटम के रूप में विचार के लिए लाया गया था, तो AADTA की कार्यकारिणी परिषद सदस्य – सीमा दास और राजपाल सिंह पवार, ने इसका कड़ा विरोध किया था। इसी क्रम में वह सभी विभागों और कॉलेजों के शिक्षकों से मिल कर, इस विषय को उनके संज्ञान में ला रही है, ताकि मुद्दे को व्यापक समर्थन मिल सके। अपने इस प्रयास में AADTA सफल होती भी दिख रही है क्योंकि विश्वविद्यालय का निगमीकरण कर उच्च शिक्षा को व्यापार बना देने की योजना पर शिक्षकों और विश्वविद्यालय समुदाय ने बड़े पैमाने पर गहरा रोष व्यक्त करना आरंभ कर दिया है,” AADTA ने प्रेस रिलीज में कहा।
AADTA ने विश्वविद्यालय द्वारा हजार करोड़ का कर्ज लेने के फैसला को भी जबरन थोपा हुआ बताया है। AADTA का कहना है कि भविष्य में इस तरह के कर्ज की कई और किश्तें लेने की प्राधिकरण की योजना के बारे में कार्यकरिणी परिषद् को जानकारी दी गई है।
“यह न सिर्फ दोहरे-स्वामित्व की स्थिति पैदा करेगा बल्कि एसी और ईसी से निर्णय लेने की शक्ति छीने जाने की स्थिति निर्मित कर डीयू को कॉर्पोरेट अधिग्रहण के लिए एक आसान शिकार बनाएगा,” AADTA ने कहा।
AADTA ने शिक्षा को व्यापार बना देने की इस मंशा को निशाना बनाते हुए इस ओर भी संकेत किया कि इससे समाज के सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों जैसे एससी, एसटी, ओबीसी, पीडब्ल्यूडी, ईडब्ल्यूएस और महिलाओं के लिए शिक्षा प्राप्ति असंभव होती जाएगी।
बता दें कि AADTA ने दिल्ली विश्वविद्यालय के शताब्दी वर्ष का हवाला देते हुए वंचित वर्ग के कल्याण को देखते हुए ऐसी किसी भी योजना को लागू नहीं करने की मांग की है। साथ ही विश्वविद्यालय से अपील की है कि वह सामाजिक न्याय के एजेंडे पर कायम रहे।
