राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में नहीं मिला ‘आडूजीवितम’ को स्थान, फैंस का छलका दर्द
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: 71वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की घोषणा शुक्रवार को दिल्ली में की गई, जहां शाहरुख़ ख़ान को ‘जवान’ और विक्रांत मैसी को ’12th फेल’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार मिला। जैसे ही यह खबर सामने आई, सोशल मीडिया पर दोनों कलाकारों की सराहना की जाने लगी, लेकिन एक बड़ी संख्या में दर्शकों और सिनेप्रेमियों के बीच निराशा की लहर दौड़ गई।
यह निराशा उन फैंस की थी जो मलयालम सुपरस्टार पृथ्वीराज सुकुमारन की फिल्म ‘आडूजीवितम: दि गोट लाइफ’ में उनके बेहतरीन अभिनय को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित होते देखने की उम्मीद कर रहे थे।
पृथ्वीराज के समर्थकों ने X (पहले ट्विटर) पर अपनी भावनाएं ज़ाहिर करते हुए पुरस्कार समिति पर नाराज़गी जताई। एक यूज़र ने लिखा, “इस इंसान ने इस फिल्म के लिए अपना खून, पसीना और सेहत तक दांव पर लगा दी, और फिर भी इसे राष्ट्रीय पुरस्कार नहीं मिला।” एक अन्य ने पोस्ट किया, “इसे कहते हैं असली अभिनय… इसे नेशनल अवॉर्ड मिलना चाहिए था।” वहीं, एक भावुक प्रशंसक ने फिल्म के दृश्य साझा करते हुए लिखा, “यहां राष्ट्रीय पुरस्कार असफल रहा, यहां हम भारतीय असफल रहे, यहां कला असफल रही, प्रतिभा असफल रही… हम असफल रहे।”
हालांकि इस विरोध और आक्रोश की भावना सच्ची और स्वाभाविक थी, लेकिन यह पूरी तरह एक तकनीकी गलतफहमी पर आधारित निकली। दरअसल, 71वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के लिए केवल वे फिल्में पात्र थीं जिन्हें वर्ष 2023 में केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) से प्रमाणन मिला था। ‘आडूजीवितम’ को CBFC द्वारा प्रमाणन 1 फरवरी 2024 को मिला और यह फिल्म मार्च 2024 में सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई। इस वजह से यह फिल्म इस वर्ष के पुरस्कार चक्र में नहीं बल्कि 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के लिए योग्य मानी जाएगी, जिसकी घोषणा अगले वर्ष की जाएगी।
निर्देशक ब्लेस्सी द्वारा निर्देशित यह फिल्म एक सच्ची कहानी पर आधारित है, जिसमें एक मलयाली प्रवासी मज़दूर नजीब की जीवटता और संघर्ष को बेहद सजीव रूप में प्रस्तुत किया गया है। पृथ्वीराज सुकुमारन ने इस किरदार के लिए जबरदस्त शारीरिक और मानसिक परिवर्तन किए थे। फिल्म को आलोचकों और दर्शकों से समान रूप से सराहना मिली और इसने ₹158 करोड़ से अधिक की कमाई की, जिससे यह अब तक की सबसे ज़्यादा कमाई करने वाली मलयालम फिल्मों में शुमार हो गई है। फिल्म में पृथ्वीराज के साथ जिमी जीन-लुईस, अमला पॉल, केआर गोकुल और शोभा मोहन ने भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं।
हालांकि इस साल ‘आडूजीवितम’ को राष्ट्रीय पुरस्कारों में स्थान नहीं मिला, लेकिन यह कहना गलत नहीं होगा कि अगले वर्ष के पुरस्कारों में यह फिल्म और पृथ्वीराज की अदाकारी प्रमुख दावेदारों में शामिल होगी। दर्शकों की उम्मीदें अब 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों पर टिकी हैं, जहां इस सजीव संघर्ष गाथा को शायद उसका योग्य सम्मान मिल सकेगा।
