APSEZ ने समुद्री सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए भारत का पहला ‘पोर्ट ऑफ़ रिफ्यूज’ स्थापित किया
चिरौरी न्यूज
अहमदाबाद: अदाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड (एपीएसईज़ेड) ने भारत का पहला “पोर्ट ऑफ रिफ्यूज” (PoR) शुरू कर दिया है, जिससे समुद्री आपात स्थितियों से निपटने के लिए देश को एक संगठित और प्रभावी तंत्र मिला है। यह पहल लंबे समय से मौजूद समुद्री आपदा प्रबंधन की कमी को दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के अनुसार, पोर्ट ऑफ रिफ्यूज वह स्थान होता है जहां संकट में फंसे जहाज शरण लेकर स्थिति को स्थिर कर सकते हैं, मानव जीवन की रक्षा कर सकते हैं और पर्यावरणीय नुकसान को कम कर सकते हैं। दुनिया के कई विकसित समुद्री देशों में ऐसी व्यवस्था पहले से मौजूद है, लेकिन भारत में अब तक इसे औपचारिक रूप नहीं दिया गया था।
एपीएसईज़ेड ने इस सुविधा के लिए दो प्रमुख स्थान तय किए हैं—पश्चिमी तट पर दिगी पोर्ट, जो अरब सागर और पर्शियन गल्फ मार्गों के जहाजों को सहायता देगा, और पूर्वी तट पर गोपालपुर पोर्ट, जो बंगाल की खाड़ी और मलक्का जलडमरूमध्य की ओर जाने वाले जहाजों के लिए सहायक होगा। इन केंद्रों पर बचाव कार्य, मलबा हटाना, अग्निशमन, प्रदूषण नियंत्रण और आपात समन्वय जैसी सेवाएं उपलब्ध होंगी।
इस पहल के तहत एपीएसईज़ेड ने एसएमआईटी साल्वेज एंड मैरीटाइम इमर्जेंसी रिस्पांस सेंटर के साथ त्रिपक्षीय समझौता किया है। एसएमआईटी साल्वेज, रॉयल बोस्कलिस वेस्टमिंस्टर एन.वी. का हिस्सा है, वैश्विक स्तर का अनुभव और तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान करेगा।
एपीएसईज़ेड के सीईओ अश्विनी गुप्ता ने कहा, “यह उपलब्धि भारत के समुद्री सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। बंदरगाह अर्थव्यवस्थाओं को जोड़ते हैं—लेकिन ‘पोर्ट ऑफ रिफ्यूज’ जीवन की रक्षा करता है। समर्पित PoR ढांचा स्थापित करके हम भारत की समुद्री तैयारी को एक नए स्तर पर ले जा रहे हैं और तटीय सुरक्षा के लिए एक वैश्विक मानक स्थापित कर रहे हैं। एपीएसईज़ेड में हम मानते हैं कि विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे के साथ विश्वस्तरीय जिम्मेदारी भी होनी चाहिए।”
वहीं, महानिदेशक (शिपिंग) श्याम जगन्नाथन ने कहा, “यह पहल भारत की समुद्री तैयारी और आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मानकीकृत ‘पोर्ट ऑफ रिफ्यूज’ ढांचे को अपनाने से समुद्री घटनाओं के दौरान अधिक समन्वित और समयबद्ध कार्रवाई संभव होगी, जिससे जीवन, माल और तटीय पर्यावरण की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित होगी।”
एसएमआईटी साल्वेज के प्रबंध निदेशक रिचर्ड जान्सेन ने कहा, “हम समुद्री सुरक्षा और समुद्री पर्यावरण की रक्षा को मजबूत कर रहे हैं, जहां इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है। संकटग्रस्त जहाज को ‘पोर्ट ऑफ रिफ्यूज’ उपलब्ध कराना बचाव कार्य में अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, जिससे जहाज और उसके माल को शीघ्र और पेशेवर तरीके से संभाला जा सके। SMIT Salvage भारत के प्रमुख समुद्री मार्गों पर तेज, सुरक्षित और समन्वित आपातकालीन प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए अपनी वैश्विक विशेषज्ञता लेकर आया है।”
यह पहल अंतरराष्ट्रीय समुद्री समझौतों के अनुरूप है और न केवल सुरक्षा एवं पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देती है, बल्कि वैश्विक समुद्री व्यापार मार्गों में भारत की भूमिका को भी मजबूत करती है।
