बालेन शाह के पीएम बनते ही नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली गैर-इरादतन हत्या के मामले में गिरफ्तार
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को शनिवार तड़के एक गैर-इरादतन हत्या के मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। यह मामला सितंबर 2025 में हुए ‘Gen Z’ विरोध प्रदर्शनों के हिंसक दमन से जुड़ा है, जिसके चलते अंततः उन्हें सत्ता से बेदखल होना पड़ा था। यह घटनाक्रम रैपर से राजनेता बने बालेन शाह के देश के नए प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ लेने के ठीक एक दिन बाद सामने आया है।
इसी मामले में नेपाली कांग्रेस के नेता और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को भी हिरासत में लिया गया है। दोनों नेताओं को भक्तपुर स्थित उनके आवासों से गिरफ्तार किया गया है और उन पर ऐसी धाराओं के तहत आरोप लगाए जाने की संभावना है, जिनमें अधिकतम 10 साल तक की जेल की सज़ा हो सकती है।
सितंबर 2025 में नेपाल में युवाओं के नेतृत्व में एक विशाल विद्रोह हुआ था, जिसे ‘Gen Z क्रांति’ का नाम दिया गया। यह विद्रोह केपी शर्मा ओली के शासनकाल में शासन की विफलता, भ्रष्टाचार, बेरोज़गारी और राजनीतिक अस्थिरता को लेकर पनपे गुस्से का नतीजा था। जो आंदोलन डिजिटल आज़ादी की मांग के साथ शुरू हुआ था, वह जल्द ही एक व्यापक सत्ता-विरोधी विद्रोह में बदल गया, जिसका सामना सरकार के कड़े दमन से हुआ। इस हिंसा में कम से कम 76 लोगों की जान चली गई और 2,000 से ज़्यादा लोग घायल हो गए।
ओली की गिरफ्तारी तब हुई, जब भ्रष्टाचार-विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा की जांच के लिए गठित नेपाल के एक उच्च-स्तरीय आयोग ने चार बार प्रधानमंत्री रह चुके और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ नेपाल (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के नेता ओली पर मुकदमा चलाने की सिफारिश की।
आयोग ने 74 वर्षीय ओली को उन कई घंटों तक चली गोलीबारी को रोकने के लिए कोई कदम न उठाने का दोषी ठहराया, जिसमें प्रदर्शनों के पहले ही दिन कम से कम 19 ‘Gen Z’ प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई थी। इसी घटना के चलते अंततः ओली को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था।
रिपोर्ट में कहा गया है, “कार्यकारी प्रमुख होने के नाते, ओली को किसी भी घटना—चाहे वह अच्छी हो या बुरी—के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।”
ओली और उनके गृह मंत्री रमेश लेखक के अलावा, आयोग ने तत्कालीन पुलिस प्रमुख चंद्र कुबेर खापुंग और दर्जनों अन्य अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की सिफारिश की है।
ओली ने आयोग के निष्कर्षों को अस्वीकार्य बताते हुए खारिज कर दिया।
