पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में बीजेपी की बढ़त, पवार परिवार का संभावित मिलन फीका पड़ा

BJP gains ground in Pune and Pimpri-Chinchwad, dimming prospects of a potential reunion of the Pawar family.चिरौरी न्यूज

नई दिल्ली:  पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम चुनावों में जिस शरद पवार–अजित पवार परिवार के मिलन का लंबे समय से इंतज़ार किया जा रहा था, वह फिलहाल असरदार साबित होता नहीं दिख रहा है। दोनों ही शहरों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने बड़ी बढ़त बना ली है।

ताज़ा रुझानों के अनुसार, पुणे नगर निगम में बीजेपी 80 वार्डों में आगे चल रही है। पवार परिवार के दो धड़ों में बंटी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) का प्रदर्शन कमजोर रहा है। NCP (अजित पवार) केवल 6 वार्डों में आगे है, जबकि NCP (शरद पवार) 3 वार्डों में बढ़त बनाए हुए है। कांग्रेस, जो उद्धव ठाकरे की शिवसेना और राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रही है, 3 वार्डों में आगे है। ठाकरे बंधुओं की पार्टियाँ अब तक किसी भी वार्ड में बढ़त हासिल नहीं कर पाई हैं।

वहीं, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना पुणे नगर निगम चुनाव अकेले लड़ रही है, लेकिन अभी तक वह भी किसी वार्ड में आगे नहीं है।

दूसरी ओर, पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम, जिसे बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के बाद राज्य के सबसे अमीर नगर निगमों में गिना जाता है, वहाँ भी बीजेपी का दबदबा साफ़ दिखाई दे रहा है। 2017 से शरद पवार की अविभाजित NCP के कब्ज़े में रहा यह निगम अब उनके हाथ से फिसलता नज़र आ रहा है। ताज़ा रुझानों के मुताबिक, बीजेपी 77 वार्डों में आगे चल रही है। NCP (अजित पवार) 37 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जबकि NCP (शरद पवार) केवल एक वार्ड में आगे है।

पिंपरी-चिंचवड़ में ठाकरे बंधुओं का गठबंधन सिर्फ़ एक वार्ड में आगे है, जबकि एकनाथ शिंदे की शिवसेना 10 वार्डों में बढ़त बनाए हुए है। कांग्रेस अब तक किसी भी वार्ड में निर्णायक बढ़त हासिल नहीं कर सकी है।

गौरतलब है कि चाचा-भतीजे शरद पवार और अजित पवार, जो कभी NCP के तहत साथ काम करते थे, 2023 में अलग हो गए थे, जब अजित पवार ने महाराष्ट्र में बीजेपी के साथ गठबंधन किया। शरद पवार का गुट राज्य और केंद्र स्तर पर विपक्षी गठबंधन का हिस्सा बना रहा।

पिछले वर्ष हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में बीजेपी के नेतृत्व वाले महायुति गठबंधन की ज़बरदस्त जीत के बाद पवार परिवार के संभावित मेल-मिलाप की अटकलें तेज़ हुई थीं, लेकिन नगर निगम चुनावों के मौजूदा रुझान उन उम्मीदों पर पानी फेरते नज़र आ रहे हैं।

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