टी20 वर्ल्ड कप 2026 का बहिष्कार? पाकिस्तान के लिए ‘विरोध’ नहीं, ‘आत्मघाती कदम’
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: क्रिकेट जगत में इस समय हलचल मची हुई है, क्योंकि पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) टी20 वर्ल्ड कप 2026 के पूर्ण बहिष्कार पर विचार कर रहा है। यह संभावित फैसला बांग्लादेश के समर्थन में लिया जा सकता है, जिसे भारत की यात्रा से इनकार करने के बाद आईसीसी ने टूर्नामेंट से बाहर कर स्कॉटलैंड को शामिल कर लिया।
इस मुद्दे पर PCB अध्यक्ष मोहसिन नक़वी ने सोमवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ से मुलाकात की। हालांकि, अंतिम फैसला फिलहाल टाल दिया गया है और इसके अगले एक सप्ताह के भीतर सार्वजनिक होने की उम्मीद है। PCB प्रमुख साफ कर चुके हैं कि टीम की वर्ल्ड कप में भागीदारी का अंतिम निर्णय सरकार के हाथ में है। यहां तक कि 15 सदस्यीय पाकिस्तानी टीम की घोषणा के बावजूद, बोर्ड ने माना है कि सरकार से अब तक औपचारिक मंजूरी नहीं मिली है।
लेकिन राजनीतिक बयानबाज़ी से इतर हकीकत कहीं ज्यादा सख्त है। पाकिस्तान के लिए वर्ल्ड कप का बहिष्कार महज़ विरोध नहीं, बल्कि एक ऐसा कदम हो सकता है जो बोर्ड और देश की क्रिकेट व्यवस्था को गहरे संकट में डाल दे।
बहिष्कार क्यों लगभग नामुमकिन है?
1. सहभागिता समझौते का उल्लंघन
आईसीसी के हर फुल मेंबर को टूर्नामेंट से पहले टूर्नामेंट पार्टिसिपेशन एग्रीमेंट (TPA) पर हस्ताक्षर करने होते हैं। आखिरी वक्त पर हटना इस कानूनी समझौते का सीधा उल्लंघन होगा।
आईसीसी पहले ही संकेत दे चुका है कि ऐसे में पाकिस्तान का वार्षिक राजस्व हिस्सा—करीब 34.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 316 करोड़ रुपये)—रोका जा सकता है। कमजोर आर्थिक हालात से जूझ रहे PCB के लिए यह झटका बोर्ड को वित्तीय तबाही की ओर धकेल सकता है।
2. आईसीसी के कड़े प्रतिबंध
अगर यह बहिष्कार सरकार के दबाव में लिया गया फैसला माना गया, तो आईसीसी इसे “राजनीतिक हस्तक्षेप” के रूप में देख सकता है। इसके परिणामस्वरूप:
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से निलंबन (जैसा कि पहले जिम्बाब्वे और श्रीलंका के साथ हो चुका है)
एशिया कप से बाहर किया जाना, भले ही ACC के अध्यक्ष स्वयं मोहसिन नक़वी हों
भविष्य के टूर्नामेंटों की मेज़बानी छिन जाना, जिसमें 2028 महिला टी20 वर्ल्ड कप भी शामिल है
3. पीएसएल पर संकट: ‘एनओसी’ का खतरा
पाकिस्तान सुपर लीग (PSL) देश की सबसे बड़ी घरेलू टी20 लीग है, जिसकी सफलता विदेशी खिलाड़ियों पर निर्भर करती है।
यदि पाकिस्तान किसी आईसीसी इवेंट का बहिष्कार करता है, तो अन्य क्रिकेट बोर्ड अपने खिलाड़ियों को PSL खेलने के लिए एनओसी देने से इनकार कर सकते हैं। इससे लीग की साख और आर्थिक ढांचा दोनों चरमरा सकते हैं।
4. अंतरराष्ट्रीय अलगाव और द्विपक्षीय सीरीज़ पर असर
क्रिकेट की अर्थव्यवस्था द्विपक्षीय दौरों पर टिकी होती है। वर्ल्ड कप जैसे बड़े आयोजन को बाधित करने से पाकिस्तान उन बोर्डों को नाराज़ कर सकता है, जिन पर उसकी घरेलू आय निर्भर है।
अगर बड़े देश पाकिस्तान का दौरा बंद कर दें, तो PCB की स्वतंत्र आय का प्रमुख स्रोत सूख सकता है।
बांग्लादेश के साथ एकजुटता दिखाना अलग बात है, लेकिन किसी आईसीसी वर्ल्ड कप का पूर्ण बहिष्कार करना पाकिस्तान क्रिकेट के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है। यह फैसला केवल एक टूर्नामेंट से दूरी नहीं, बल्कि वैश्विक क्रिकेट में पाकिस्तान की स्थिति, आर्थिक स्थिरता और भविष्य पर गहरा प्रहार होगा।
