राणा सांगा के खिलाफ टिप्पणी या योगी आदित्यनाथ के खिलाफ राजनीतिक षड्यंत्र

Comment against Rana Sanga or political conspiracy against Yogi Adityanathरीना एन सिंह, अधिवक्ता सुप्रीम कोर्ट  

राणा सांगा, भारतीय इतिहास के एक महान योद्धा और राजपूत शौर्य के प्रतीक माने जाते हैं।हाल ही में उनके विरुद्ध की गई अपमानजनक टिप्पणियाँ एक सुनियोजित साजिश का हिस्साप्रतीत होती हैं।

विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस षड्यंत्र के पीछे राजनीतिक स्वार्थ और उत्तर प्रदेश की सत्ता में बदलाव की गहरी चालें चल रही हैं। यह केवल एक ऐतिहासिक मुद्दा नहीं है, बल्कि योगी आदित्यनाथ जी को अस्थिर करने की एक रणनीति है।सूत्रों के अनुसार, भाजपा के एक प्रभावशाली बाहुबली नेता उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने की महत्वाकांक्षा रखते हैं। केंद्र के कुछ बड़े नेताओं से कथित रूप से उन्हें समर्थन प्राप्त है।

यह साजिश योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता को कम करने और उन्हें हटाने के उद्देश्य से रची गई है। जिस दिन योगी आदित्यनाथ जी आगरा में थे, उसी दिन यह विवाद खड़ा किया गया। यह पूर्व-नियोजित षड्यंत्र का स्पष्ट संकेत है। स्वजातीय पहचान को मुद्दा बनाने की कोशिश की गई ताकि राजपूत समाज को भ्रमित किया जा सके। इतिहास से छेड़छाड़ करके राजपूत समाज को विभाजित करने की योजना बनाई गई। इस पूरे प्रकरण की फंडिंग कथित रूप से भाजपा के एक बाहुबली नेता द्वारा की जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, इस साजिश का मास्टरमाइंड अभी दिल्ली में सक्रिय है और पूरे षड्यंत्र का संचालन वहीं से किया जा रहा है। यह केवल एक ऐतिहासिक विवाद नहीं है, बल्कि एक राजनीतिक षड्यंत्र है, जिसमें केंद्र और राज्य की राजनीति का संतुलन बदलने की कोशिश की जा रही है। इस विवाद से राजपूत समाज को विभाजित करने की कोशिश की गई है। यदि इस पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो इससे भाजपा को ही नुकसान हो सकता है। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता बहुत अधिक है। उनकी छवि को नुकसान पहुँचाने के लिए यह विवाद जानबूझकर खड़ा किया गया है।

इस विवाद से साफ है कि भाजपा के ही कुछ नेता योगी आदित्यनाथ को हटाकर मुख्यमंत्री बनने की योजना बना रहे हैं। यदि पार्टी इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लेती, तो इससे भविष्य में बड़ा राजनीतिक संकट उत्पन्न हो सकता है। राणा सांगा के खिलाफ की गई टिप्पणी केवल एक ऐतिहासिक अपमान नहीं, बल्कि एक गहरी राजनीतिक साजिश का हिस्सा है। यह षड्यंत्र उत्तर प्रदेश की सत्ता संरचना को बदलने के लिए रचा गया है, जिसमें भाजपा के कुछ बड़े नेता और बाहुबली नेता शामिल हो सकते हैं।

यदि इस षड्यंत्र को समय रहते बेनकाब नहीं किया गया, तो इसका असर न केवल योगी आदित्यनाथ पर पड़ेगा, बल्कि भाजपा और संपूर्ण राजपूत समाज पर भी गहरा प्रभाव डालेगा। भाजपा को इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए। राजपूत समाज को इस षड्यंत्र से सतर्क रहना चाहिए और ऐतिहासिक विरासत की रक्षा करनी चाहिए। योगी आदित्यनाथ समर्थकों को इस मुद्दे पर जागरूकता फैलानी चाहिए और साजिश के पीछे के चेहरों को बेनकाब करना चाहिए।

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