कांग्रेस ने मुस्लिम को 5 प्रतिशत आरक्षण देने के पुराने फैसले को ‘रद्द’ करने के महाराष्ट्र सरकार के कदम की निंदा की
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: कांग्रेस ने बुधवार को महाराष्ट्र की महायुति सरकार के उस फैसले की कड़ी आलोचना की, जिसमें मुस्लिम समुदाय के विशेष पिछड़ा वर्ग–ए (एसबीसी–ए) के अंतर्गत आने वाले व्यक्तियों को जाति प्रमाणपत्र और जाति वैधता प्रमाणपत्र जारी करने संबंधी पूर्व के सभी शासकीय प्रस्तावों और परिपत्रों को निरस्त कर दिया गया है।
कांग्रेस का कहना है कि मंगलवार को जारी शासकीय प्रस्ताव का स्पष्ट अर्थ यह है कि मुस्लिम समुदाय को दिया गया आरक्षण प्रभावी रूप से समाप्त कर दिया गया है।
मुंबई क्षेत्रीय कांग्रेस समिति की अध्यक्ष एवं सांसद वर्षा गायकवाड़ ने राज्य सरकार के इस कदम को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, “हम इस निर्णय की कड़ी निंदा करते हैं। वर्ष २०१४ में शिक्षा और रोजगार के लिए घोषित पाँच प्रतिशत आरक्षण के संबंध में सकारात्मक पहल करने के बजाय सरकार ने पुरानी प्रक्रियाओं को ही समाप्त कर दिया है। उच्च न्यायालय की अंतरिम स्थगन आदेश और अध्यादेश की अवधि समाप्त होने का हवाला देकर सरकार ने मुस्लिम समुदाय के अधिकारों पर गंभीर प्रहार किया है।”
उन्होंने आगे कहा, “एक ओर ‘सबका साथ, सबका विकास’ की बात की जाती है और दूसरी ओर आरक्षण हेतु आवश्यक दस्तावेज प्राप्त करने के मार्ग बंद कर दिए जाते हैं—क्या यह दोहरा व्यवहार नहीं है? यद्यपि मुंबई उच्च न्यायालय ने शिक्षा में मुस्लिम समुदाय को पाँच प्रतिशत आरक्षण को स्वीकृति प्रदान की है, परंतु आज तक महाराष्ट्र में इसका प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हुआ है। न्यायालय द्वारा स्वीकृत आरक्षण को लागू न करना लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रतिकूल है।”
गायकवाड़ ने आरोप लगाया कि समाज के पिछड़े वर्गों को मुख्यधारा में लाने के बजाय राज्य सरकार ने उन्हें और अधिक हाशिये पर धकेल दिया है।
मंगलवार देर शाम सामाजिक न्याय एवं विशेष सहायता विभाग की उप सचिव वर्षा देशमुख द्वारा जारी शासकीय प्रस्ताव का शीर्षक था—“राज्य में विशेष पिछड़ा वर्ग–ए के अंतर्गत मुस्लिम समुदाय को जाति प्रमाणपत्र और जाति वैधता प्रमाणपत्र जारी करने संबंधी शासकीय प्रस्तावों एवं परिपत्रों का निरस्तीकरण।”
इस प्रस्ताव में नौ जुलाई २०१४ के महाराष्ट्र अध्यादेश क्रमांक १४, वर्ष २०१४ का उल्लेख किया गया है, जिसके अंतर्गत सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े मुस्लिम वर्गों को विशेष पिछड़ा वर्ग–ए के तहत शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश तथा शासकीय और अर्द्धशासकीय सेवाओं में भर्ती के लिए पाँच प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया गया था। इसके आधार पर संबंधित विभागों ने आवश्यक दिशानिर्देश और प्रक्रियाएँ जारी की थीं, जिन्हें अब निरस्त कर दिया गया है।
