बेंगलुरु के बाहरी इलाकों में अतिक्रमण हटाने पर कांग्रेस में मतभेद, बैकफुट पर सिद्धारमैया सरकार

चिरौरी न्यूज
बेंगलुरु: बेंगलुरु के बाहरी इलाकों में अतिक्रमण हटाने की मुहिम को लेकर कर्नाटक की सत्तारूढ़ कांग्रेस के भीतर मतभेद उभर आए हैं। येलाहंका के पास कोगिलु गांव में की गई बेदखली कार्रवाई के बाद स्थानीय स्तर पर विरोध, विपक्ष के हमले और सहयोगी संगठनों की तीखी प्रतिक्रियाओं ने राज्य सरकार को दबाव में ला दिया है।
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने शनिवार को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से इस मुद्दे पर चर्चा की। वेणुगोपाल ने कहा कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी इस बात से बेहद चिंतित है कि बेदखली की कार्रवाई जिस तरह से की गई, उसमें पर्याप्त संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण का अभाव रहा। उन्होंने जोर दिया कि ऐसे मामलों में फैसले लेते समय मानवीय लागत को केंद्र में रखा जाना चाहिए।
Spoke to Karnataka CM @siddaramaiah and DCM @DKShivakumar regarding the demolition of unauthorised constructions in Kogilu village, Bengaluru.
Conveyed the AICC’s serious concern that such actions should have been undertaken with far greater caution, sensitivity, and…
— K C Venugopal (@kcvenugopalmp) December 27, 2025
वेणुगोपाल के अनुसार, मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया है कि वे व्यक्तिगत रूप से प्रभावित परिवारों से मिलेंगे, शिकायत निवारण तंत्र स्थापित किया जाएगा और पुनर्वास व राहत की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
जमीनी स्तर पर विरोध और आरोप
बेदखली के खिलाफ सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) और स्थानीय निवासियों ने विरोध प्रदर्शन किए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार ने पर्याप्त वैकल्पिक व्यवस्था किए बिना कमजोर परिवारों को विस्थापित किया। उनकी मांग है कि बेघर हुए लोगों के लिए तत्काल पुनर्वास, अस्थायी आश्रय और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
एसडीपीआई कर्नाटक के महासचिव मुजाहिद पाशा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार वही बेदखली की राजनीति दोहरा रही है, जिसकी वह पहले आलोचना करती रही है। उन्होंने सरकार के इस दावे को भी खारिज किया कि निवासी अवैध अप्रवासी थे या जमीन केवल ठोस कचरा प्रबंधन के लिए आरक्षित थी। उनके अनुसार, इस कार्रवाई में मानवीय पहलुओं को नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने कहा कि केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की टिप्पणी से यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आ गया है।
सरकार ने कार्रवाई का किया बचाव
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बेदखली का बचाव करते हुए कहा कि कोगिलु बडावने इलाके की जमीन कचरा डंपिंग के लिए आरक्षित थी और इंसानों के रहने के लिए अनुपयुक्त थी, जिस पर अतिक्रमण किया गया था। उन्होंने बताया कि परिवारों को कई बार नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, जिसके बाद कार्रवाई करनी पड़ी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) आयुक्त को अस्थायी आश्रय, भोजन और अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वहां रहने वाले अधिकांश लोग प्रवासी मजदूर थे और मानवीय आधार पर उनके लिए उपयुक्त आवास व्यवस्था की जाएगी।
बीजेपी का कांग्रेस नेतृत्व पर हमला
इस बीच, बीजेपी ने कांग्रेस नेतृत्व पर तीखा हमला बोला है। विपक्ष के नेता आर अशोक ने केसी वेणुगोपाल पर राज्य प्रशासन में “हस्तक्षेप” करने का आरोप लगाते हुए इसे संघीय ढांचे का अपमान बताया। उन्होंने सवाल किया कि वेणुगोपाल किस हैसियत से कर्नाटक सरकार के कामकाज में दखल दे रहे हैं।
अशोक ने कहा कि यह मामला मानवीय संवेदनशीलता से ज्यादा कांग्रेस हाईकमान की राजनीति और चुनावी गणनाओं से जुड़ा है। उन्होंने जोर दिया कि मानवीय चिंताओं का समाधान कानून, उचित प्रक्रिया और जवाबदेह राज्य तंत्र के जरिए होना चाहिए, न कि ऐसे पार्टी पदाधिकारियों के निर्देशों से जिनकी कोई संवैधानिक भूमिका नहीं है।
