संभल में तेजी से घटती हिंदू आबादी पर गहराई चिंता, न्यायिक आयोग की रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे

Deep concern over the rapidly decreasing Hindu population in Sambhal, the report of the judicial commission made many shocking revelationsचिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के संभल ज़िले में बीते वर्ष 24 नवंबर को शाही जामा मस्जिद के पास हुई सांप्रदायिक हिंसा की न्यायिक जांच रिपोर्ट ने एक बार फिर जिले में तेजी से घटती हिंदू आबादी और बदले हुए जनसांख्यिकीय संतुलन को लेकर राजनीतिक हलकों में गहरी चिंता पैदा कर दी है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपे गए तीन सदस्यीय न्यायिक आयोग की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि संभल जिले में स्वतंत्रता के समय 45% रही हिंदू आबादी अब घटकर मात्र 15% रह गई है, जबकि 85% मुस्लिम आबादी है।

न्यायिक आयोग द्वारा प्रस्तुत की गई रिपोर्ट में 24 नवंबर 2024 को हुई हिंसा की विस्तृत जांच के साथ-साथ जिले के लंबे समय से चले आ रहे सांप्रदायिक संघर्षों और उनकी पृष्ठभूमि का भी विवरण दिया गया है।

हिंसा की पृष्ठभूमि:

हिंसा उस समय भड़की जब पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) की निगरानी में शाही जामा मस्जिद का सर्वेक्षण किया जा रहा था। यह सर्वे स्थानीय अदालत के आदेश पर किया जा रहा था, क्योंकि हिंदू याचिकाकर्ताओं ने दावा किया था कि मस्जिद एक प्राचीन हरिहर मंदिर के स्थान पर बनाई गई थी।

रिपोर्ट के प्रमुख खुलासे:

  • 1947 से लेकर अब तक के दंगों में हिंदुओं को ‘प्राथमिक निशाना’ बनाया गया, जिसमें नवंबर 2024 की घटना भी शामिल है।
  • पुलिस प्रशासन की तत्परता से एक संभावित नरसंहार टल गया, क्योंकि बड़ी संख्या में बाहरी उपद्रवियों को इलाके में लाया गया था।
  • ‘तुर्क-पठान’ तनाव को भी रिपोर्ट में हिंसा के पीछे की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के रूप में जोड़ा गया है।
  • बाबर की विरासत का उल्लेख कर लोगों की भावनाएं भड़काई गईं।
  • कट्टरपंथी संगठनों, अवैध हथियारों की तस्करी, और नशीली दवाओं के नेटवर्क को संभल को अस्थिर करने की कोशिशों से जोड़ा गया।

रिपोर्ट में 1953 के शिया-सुन्नी संघर्ष से लेकर 1956, 1959, 1962 (जब जनसंघ विधायक महेश गुप्ता की हत्या हुई), 1966 और 1976 की साम्प्रदायिक घटनाओं का भी जिक्र किया गया है।

जनसांख्यिकीय बदलाव और हिंदू पलायन: एक गंभीर चेतावनी

रिपोर्ट में यह भी साफ कहा गया है कि यह सिर्फ धार्मिक तनाव या स्थानीय विवाद नहीं, बल्कि एक सुनियोजित जनसांख्यिकीय परिवर्तन का हिस्सा हो सकता है। आयोग ने चेताया कि अगर ऐसे बदलावों को समय रहते नहीं रोका गया, तो यह क्षेत्रीय असंतुलन, सांस्कृतिक संकट, और राष्ट्र की अखंडता के लिए खतरा बन सकता है।

इस बड़े बदलाव को लेकर राज्य की राज्य मंत्री गुलाब देवी ने कहा कि यह स्थिति “बेहद चिंताजनक” है।

उन्होंने कहा, “जांच में सामने आया है कि हिंदू जनसंख्या में 30 प्रतिशत की गिरावट आई है। ये लोग कहां गए? क्या वे पलायन कर गए? क्या उनका धर्म परिवर्तन हुआ? या फिर उनकी हत्या कर दी गई? उच्च न्यायालय या हमारी सरकार इस रिपोर्ट के तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई करेगी।”

मंत्री गुलाब देवी के बयान के बाद माना जा रहा है कि राज्य सरकार इस रिपोर्ट के आधार पर संभवतः विशेष जांच या कार्रवाई की घोषणा कर सकती है। साथ ही, सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने और जनसांख्यिकीय संतुलन की रक्षा के लिए विशेष रणनीति भी बनाई जा सकती है।

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