दिल्ली दंगों की साजिश मामला: सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से किया इनकार
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को वर्ष 2020 के दिल्ली दंगों की कथित बड़ी साजिश से जुड़े मामले में जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया। हालांकि, अदालत ने इसी मामले में गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा-उर-रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत दे दी।
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ ने कहा कि उपलब्ध अभियोजन सामग्री के आधार पर उमर खालिद और शरजील इमाम के खिलाफ प्रथम दृष्टया आरोप बनते हैं और उन पर यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) के तहत जमानत की कठोर शर्तें लागू होती हैं। ऐसे में इस चरण पर उन्हें जमानत नहीं दी जा सकती।
उमर खालिद और शरजील इमाम ने दिल्ली हाईकोर्ट के 2 सितंबर 2023 के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उनकी जमानत याचिकाएं खारिज कर दी गई थीं।
गौरतलब है कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली में 24 फरवरी 2020 को नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और एनआरसी के विरोध के दौरान सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी थी। कई दिनों तक चली इस हिंसा में 50 से अधिक लोगों की मौत हुई थी, जिनमें अधिकांश मुस्लिम थे, जबकि 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। यह हिंसा राजधानी में दशकों की सबसे भयावह घटनाओं में से एक मानी जाती है।
दिल्ली पुलिस ने इस मामले में 20 लोगों पर दंगों की बड़ी साजिश रचने का आरोप लगाया है, जिनमें उमर खालिद, शरजील इमाम और आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन भी शामिल हैं। पुलिस का दावा है कि दंगे अचानक नहीं भड़के थे, बल्कि यह भारत की संप्रभुता पर हमला करने के लिए पहले से योजनाबद्ध और संगठित साजिश थी।
पुलिस के अनुसार, दंगों से जुड़े कुल 757 एफआईआर दर्ज की गई थीं। इनमें से 273 मामलों में जांच जारी है, जबकि 250 मामलों में मुकदमा चल रहा है।
उमर खालिद को सितंबर 2020 में गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने यह दावा किया है कि दंगों के समय वे दिल्ली में मौजूद नहीं थे और उन्हें उनके विरोध प्रदर्शनों के कारण “सजा” के तौर पर जेल में रखा जा रहा है। उन्हें इससे पहले बहन की शादी सहित कुछ निजी कारणों से सीमित अवधि के लिए अंतरिम जमानत मिल चुकी है।
वहीं, शरजील इमाम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने अदालत में दलील दी कि बिना किसी मुकदमे या दोषसिद्धि के उन्हें “खतरनाक बौद्धिक आतंकवादी” बताया जा रहा है। इमाम ने कहा कि वे एक भारतीय नागरिक हैं और अब तक किसी भी अपराध में दोषी नहीं ठहराए गए हैं। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि उनकी गिरफ्तारी 28 जनवरी 2020 को हुई थी, जो दंगों से पहले की है, और केवल भाषण देने को दंगों की साजिश से नहीं जोड़ा जा सकता।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों के बावजूद इस स्तर पर उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया।
