Dream11 के हटने के बावजूद BCCI की रिकार्डतोड़ कमाई बरकरार
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: दुनिया का सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) मैदान के बाहर की चुनौतियों से बेअसर दिख रहा है। बड़े स्पॉन्सर Dream11 के अचानक हटने के बावजूद बोर्ड की वित्तीय स्थिति न केवल स्थिर बनी हुई है, बल्कि और मज़बूत होती नज़र आ रही है।
क्रिकबज की रिपोर्ट के मुताबिक, BCCI ने Dream11 के जाने से बने खालीपन को जल्दी ही भर लिया है। बोर्ड ने Adidas और Apollo Tyres के साथ नई स्पॉन्सरशिप डील साइन की हैं। इसके अलावा, ढाई साल के लिए पहले से अधिक कीमत पर नई जर्सी स्पॉन्सरशिप हासिल की गई है, जो BCCI की मजबूत कमर्शियल अपील को दर्शाती है।
गौरतलब है कि अगस्त में भारतीय सरकार द्वारा ऑनलाइन गेमिंग प्रमोशन एंड रेगुलेशन एक्ट, 2025 लागू किए जाने के बाद Dream11 ने अपनी 358 करोड़ रुपये की स्पॉन्सरशिप डील से खुद को अलग कर लिया था। इस कानून के तहत रियल-मनी गेमिंग पर रोक लगने से Dream11 के मुख्य कारोबार पर असर पड़ा और उसे टीम इंडिया के टाइटल स्पॉन्सर की भूमिका छोड़नी पड़ी। यह डील 2023 से 2026 के चक्र के लिए थी, लेकिन एक साल पहले ही समाप्त हो गई।
इसके बावजूद, ICC इवेंट्स से अपेक्षाकृत कम रेवेन्यू हिस्सेदारी के बीच भी BCCI की आर्थिक सेहत मजबूत बनी हुई है। पूर्व कोषाध्यक्ष और वर्तमान संयुक्त सचिव प्रभतेज सिंह भाटिया ने 2025–26 वित्तीय वर्ष का ड्राफ्ट बजट और 2024–25 के ऑडिटेड अकाउंट्स पेश किए। आंकड़ों के अनुसार, BCCI का जनरल फंड 7,988 करोड़ रुपये से बढ़कर 11,346 करोड़ रुपये हो गया है, जिससे 3,358 करोड़ रुपये का सरप्लस दर्ज किया गया। यह बढ़ोतरी मजबूत आय स्रोतों और सतर्क वित्तीय प्रबंधन का नतीजा मानी जा रही है।
आगे की ओर देखते हुए, बोर्ड ने 2025–26 के लिए 8,693 करोड़ रुपये की आय का अनुमान लगाया है। हालांकि ICC से मिलने वाले रेवेन्यू में गिरावट के चलते यह आंकड़ा पिछले वर्ष से थोड़ा कम है, लेकिन बढ़ती ब्याज आय इसे संतुलित कर रही है। अनुमान के मुताबिक, ब्याज से होने वाली आय 1,368 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,500 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है, जो कुशल ट्रेजरी प्रबंधन को दर्शाता है।
टैक्स और भविष्य की तैयारियां
एपेक्स काउंसिल को यह भी जानकारी दी गई कि BCCI ने भविष्य की देनदारियों को ध्यान में रखते हुए बड़े प्रावधान किए हैं। इनकम टैक्स के लिए करीब 3,320 करोड़ रुपये, आपातकालीन खर्चों के लिए 1,000 करोड़ रुपये और कानूनी मामलों के लिए 160 करोड़ रुपये अलग रखे गए हैं। इसके अलावा, देशभर में क्रिकेट इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
कुल मिलाकर, बदलते नियमों और स्पॉन्सरशिप में उतार-चढ़ाव के बावजूद BCCI की आर्थिक रफ्तार थमती नहीं दिख रही है। बोर्ड लगातार आगे बढ़ रहा है और एक बार फिर साबित कर रहा है कि वह सिर्फ क्रिकेट ही नहीं, बल्कि फाइनेंस के मैदान में भी सबसे आगे है।
