वेव सिटी में विकास बनाम ‘अराजक तत्व’ निवेशकों के हितों पर मंडराता संकट

Development vs. 'Anarchic Elements' in Wave City: A Looming Crisis Over Investors' Interestsचिरौरी न्यूज

गाजियाबाद: शहर की हाई टेक सिटी ‘वेव सिटी’ में पिछले कुछ समय से जारी गतिरोध अब केवल मुआवजे का विवाद नहीं रह गया है, बल्कि यह विकास कार्यों में जानबूझकर डाली जा रही बाधा और कानून-व्यवस्था की चुनौती बन गया है। आए दिन अराजक तत्व इस परियोजना के विकास कार्यों में बाधा पहुंचाने का भी काम कर रहे हैं।

बिल्डर का स्पष्ट तर्क है कि परियोजना के लिए आवश्यक सभी भूमि अधिग्रहण प्रक्रियाएं कानूनी दायरे में पूरी की गई हैं। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण और यूपी रेरा से सभी आवश्यक स्वीकृतियाँ और एनओसी प्राप्त होने के बाद ही निर्माण कार्य शुरू किया गया था। ऐसे में, निर्माण स्थल पर भीड़ का पहुंचना और काम रुकवाना न केवल अवैध है, बल्कि यह प्रशासन द्वारा दी गई स्वीकृतियों का भी अपमान है।

बिल्डर प्रबंधन का आरोप है कि कुछ असामाजिक और अराजक तत्व ‘किसान’ होने का मुखौटा पहनकर निजी स्वार्थ साध रहे हैं। साइट पर तैनात निहत्थे कर्मचारियों के साथ गाली-गलौज, मारपीट और जान से मारने की धमकी देना यह दर्शाता है कि यह विरोध लोकतांत्रिक न होकर हिंसक है। 14 फरवरी की घटना, जिसमें 50 से अधिक लोगों ने साइट पर हमला किया, निवेशकों के मन में असुरक्षा का भाव पैदा करती है।

इस अराजकता का सबसे बड़ा खामियाजा उन हजारों मध्यमवर्गीय खरीदारों को भुगतना पड़ रहा है जिन्होंने अपनी जीवन भर की कमाई इन घरों में लगा दी है। बार-बार काम रुकने से प्रोजेक्ट की लागत बढ़ती है और पजेशन में देरी होती है। यहां के लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन ने इन ‘अराजक तत्वों’ पर सख्त कार्रवाई नहीं की, तो यहां रहने वाले लोगों को भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ेगा।

लोगों की मांग है कि यहां कानून का शासन स्थापित होना चाहिए। यदि किसी को मुआवजे से संबंधित कोई शिकायत है, तो उसका समाधान न्यायालय या ट्रिब्यूनल में होना चाहिए, न कि निर्माणाधीन साइटों पर हिंसा और गुंडागर्दी के माध्यम से। पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर इस दिशा में एक जरूरी कदम है ताकि विकास की प्रक्रिया को बंधक बनने से बचाया जा सके।

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