अनिरुद्धाचार्य के विवादित बयान पर भड़कीं दिशा पाटनी की बहन खुशबू, “औरतों को नीचा दिखाने वाले नामर्द हैं”
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: धार्मिक प्रवचनकर्ता अनिरुद्धाचार्य एक बार फिर विवादों के घेरे में आ गए हैं। इस बार उन्होंने लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर महिलाओं पर टिप्पणी की, जिसने सोशल मीडिया पर भारी आलोचना को जन्म दिया है। अपने हालिया प्रवचन में अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि “25 की उम्र तक ज्यादातर महिलाएं चार से पांच पुरुषों के साथ सो चुकी होती हैं।” इस आपत्तिजनक और सामान्यीकरण भरे बयान को लेकर देशभर में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
लेकिन इन तमाम प्रतिक्रियाओं के बीच जो स्वर सबसे मुखर और प्रभावशाली रहा, वह था खुशबू पाटनी का। बॉलीवुड अभिनेत्री दिशा पाटनी की बड़ी बहन खुशबू पाटनी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो साझा करते हुए अनिरुद्धाचार्य की कड़ी आलोचना की और उनके बयान को महिला विरोधी मानसिकता का प्रतीक बताया। अपने वीडियो में उन्होंने न सिर्फ अनिरुद्धाचार्य को “हरामी” कहकर संबोधित किया, बल्कि उनके अनुयायियों को भी “नामर्द” और “देशद्रोही” कहने से नहीं चूकीं।
खुशबू ने सवाल उठाया कि आखिर क्यों हर बार लिव-इन रिलेशनशिप में महिलाओं को ही निशाना बनाया जाता है, जबकि उन रिश्तों में पुरुष भी बराबरी से शामिल होते हैं? उन्होंने कहा कि यह प्रवचन महिलाओं की पसंद और स्वायत्तता पर सीधा हमला है। उन्होंने यह भी कहा कि वयस्कों के बीच सहमति से बने रिश्तों को अब भी टैबू मानना इस समाज की दोहरी मानसिकता को दर्शाता है।
वीडियो में उन्होंने साफ कहा कि समाज के कुछ वर्ग अब भी महिलाओं की आज़ादी से डरते हैं और उनके फैसलों को नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं। खुशबू की बातों को ऑनलाइन भरपूर समर्थन मिला, खासकर उन लोगों से जो वर्षों से महिलाओं की यौन स्वतंत्रता और समान अधिकारों के पक्ष में खड़े हैं।
जहां अधिकतर लोग खुशबू को सिर्फ दिशा पाटनी की बहन के रूप में जानते हैं, वहीं उनकी अपनी एक विशिष्ट पहचान है। खुशबू पाटनी भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट रह चुकी हैं और उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की है। उत्तर प्रदेश के बरेली की रहने वाली खुशबू ने सरकारी परीक्षा पास कर सेना में सेवा दी और अपने कर्तव्य के प्रति समर्पण से पहचान बनाई।
दिशा पाटनी अक्सर अपनी बहन को “वंडर वुमन” कहती हैं और उनकी ताकत व संकल्प की प्रशंसा करती हैं। इस विवाद पर खुशबू का खुला और तीखा रुख यह साबित करता है कि वे न सिर्फ एक सशक्त महिला हैं, बल्कि एक ऐसी आवाज भी हैं जो अन्याय के खिलाफ बिना डरे खड़ी होती है।
