आर्थिक समीक्षा 2025-26: भारत का औद्योगिक प्रदर्शन मजबूत, विनिर्माण और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में तेजी

चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री ने संसद में आर्थिक समीक्षा 2025-26 पेश करते हुए बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में उद्योग का संवर्धित सकल मूल्य (GVA) साल दर साल 7.0 प्रतिशत बढ़ा। यह वृद्धि पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में 5.9 प्रतिशत रहने के बाद औद्योगिक क्षेत्र में मजबूत सुधार का संकेत देती है।
आर्थिक समीक्षा के अनुसार, वित्त वर्ष 26 की पहली और दूसरी तिमाही में विनिर्माण GVA क्रमश: 7.72 और 9.13 प्रतिशत बढ़ा। इस सुधार के पीछे विनिर्माण क्षेत्र में जारी ढांचागत बदलाव हैं, जैसे महंगे विनिर्माण खंड की ओर रुझान, कॉरिडोर आधारित विकास के माध्यम से औद्योगिक इन्फ्रास्ट्रक्चर में सुधार, प्रौद्योगिकी का व्यापक अपनाना और कंपनियों का औपचारिककरण।
समीक्षा में कहा गया कि भारत के कुल विनिर्माण मूल्य संवर्धन में मध्यम और उच्च प्रौद्योगिकी गतिविधियों की हिस्सेदारी 46.3 प्रतिशत हो गई। इसमें PLI योजनाएं और भारतीय सेमीकंडक्टर मिशन जैसी सरकारी पहलें, साथ ही इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, रसायन और परिवहन क्षेत्रों में घरेलू क्षमता का विस्तार शामिल है।
भारत का प्रतिस्पर्धी औद्योगिक प्रदर्शन (CIP) भी सुधरा है, 2023 में 37वें स्थान पर पहुंचा जबकि 2022 में यह 40वें स्थान पर था।
बैंकिंग और वित्त पोषण:
समीक्षा के अनुसार, वाणिज्यिक बैंकों के औद्योगिक कर्ज में वृद्धि वित्त वर्ष 25 में 8.24 प्रतिशत रही, जो पिछले वर्ष 9.39 प्रतिशत थी। हालांकि, गैर-बैंकिंग स्रोतों से वाणिज्यिक क्षेत्र को वित्त की आपूर्ति में 17.32 प्रतिशत CAGR की वृद्धि दर्ज की गई, जिससे उद्योग को वैकल्पिक वित्तपोषण मिल रहा है।
मुख्य उद्योग:
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इस्पात और सीमेंट: भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इस्पात और सीमेंट उत्पादक बना। घरेलू सीमेंट खपत प्रति व्यक्ति लगभग 290 किलोग्राम है। बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्टों और ग्रामीण विकास योजनाओं से सीमेंट की मांग बढ़ने की उम्मीद है।
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कोयला: वित्त वर्ष 25 में कोयला उत्पादन 1,047.52 मिलियन टन तक पहुंच गया, पिछले वर्ष 997.83 मिलियन टन की तुलना में 4.98 प्रतिशत अधिक।
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रसायन और पेट्रो-रसायन: विनिर्माण GVA में 8.1 प्रतिशत का योगदान।
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वाहन उद्योग: वित्त वर्ष 15-25 के दौरान उत्पादन में लगभग 33 प्रतिशत वृद्धि। इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के लिए सरकारी पहलों के कारण पंजीकरण में तेज बढ़ोतरी। PLI-Auto, PLI-ACC, PM E-Drive, PM E-Bus, SMECC जैसी योजनाएं इस विकास में मददगार रही।
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इलेक्ट्रॉनिक्स: वित्त वर्ष 25 में तीसरी बड़ी निर्यात श्रेणी बन गई। मोबाइल विनिर्माण खंड ने उत्पादन मूल्य को वित्त वर्ष 15 के 18,000 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 5.45 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचाया।
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फार्मास्यूटिकल्स: वित्त वर्ष 25 में 191 देशों को निर्यात किया गया, वैश्विक जेनेरिक्स में लगभग 20 प्रतिशत योगदान। पिछले दशक में निर्यात में 7 प्रतिशत CAGR वृद्धि हुई, और टर्नओवर 4.72 लाख करोड़ रुपए तक पहुंचा।
भविष्य का रोडमैप:
समीक्षा में कहा गया कि औद्योगीकरण के अगले दौर में आयात पर निर्भर मॉडल की बजाय विविधीकरण, प्रतिस्पर्धा, नवाचार और जीवीसी में व्यापक एकीकरण पर जोर देना होगा। R&D, प्रौद्योगिकी अपनाना, कौशल विकास और निजी क्षेत्र में निवेश बढ़ाना आवश्यक है।
इस आर्थिक समीक्षा से स्पष्ट है कि भारत का औद्योगिक क्षेत्र मजबूत रफ्तार से बढ़ रहा है, और विनिर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स और वाहन उद्योग विशेष रूप से प्रमुख योगदान दे रहे हैं।
