गौरव गोगोई के कथित पाकिस्तान लिंक मामला: असम कैबिनेट का केस गृह मंत्रालय को सौंपने का फैसला
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: असम कैबिनेट ने कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई से जुड़े कथित पाकिस्तान संबंधों के मामले को केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) को सौंपने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शनिवार को कैबिनेट बैठक के बाद इसकी जानकारी दी।
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है और कैबिनेट का मानना है कि यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा, “असम सरकार ने अली तौकीर शेख द्वारा एक ब्रिटिश नागरिक और एक सांसद के साथ मिलकर कथित ‘भारत-विरोधी साज़िश’ की जांच के लिए SIT का गठन किया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे गृह मंत्रालय को सौंपने का निर्णय लिया गया है।”
यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब राज्य में विधानसभा चुनाव कुछ ही महीनों दूर हैं, जिससे यह मुद्दा एक बड़ा राजनीतिक विवाद बन गया है। मुख्यमंत्री सरमा लगातार आरोप लगाते रहे हैं कि कांग्रेस के पाकिस्तान से संबंध हैं। उनका दावा है कि गोगोई की पत्नी पहले एक ऐसे एनजीओ से जुड़ी थीं, जिसके पाकिस्तान से संबंध बताए जा रहे हैं, और सांसद स्वयं भी अतीत में पाकिस्तान जा चुके हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा, “अगर असम से कोई सांसद, वह भी गौरव गोगोई, पाकिस्तान से किसी भी तरह जुड़ा हो, तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। मुझे जानकारी मिली है कि उन्होंने एक प्रतिनिधिमंडल के साथ पाकिस्तान उच्चायोग जाकर तत्कालीन उच्चायुक्त अब्दुल बासित से मुलाकात की थी। मुझे याद नहीं कि किसी अन्य नेता ने ऐसा किया हो।”
सरमा ने यह भी स्पष्ट किया कि SIT रिपोर्ट और इस मामले में दर्ज FIR को केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।
उन्होंने कहा, “हमने अब तक सांसद गौरव गोगोई से पूछताछ नहीं की है। उनके पद का सम्मान करते हुए मामला केंद्र को सौंपा गया है। अगर अभी कड़ी कार्रवाई होती, तो मुझ पर चुनाव से पहले राजनीति करने का आरोप लगाया जाता।”
तीन प्रमुख किरदारों से जुड़ा मामला
मुख्यमंत्री के अनुसार, कैबिनेट की राय थी कि यह मामला किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि तीन अहम किरदारों से जुड़ा है:
- एक सांसद
- उनकी ब्रिटिश नागरिक पत्नी
- पाकिस्तानी नागरिक अली तौकीर शेख
राज्य सरकार ने अली तौकीर शेख पर भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए SIT गठित की थी। मुख्यमंत्री ने बताया कि SIT ने 10 सितंबर की तय समयसीमा तक अपनी रिपोर्ट सौंप दी है।
सरमा ने यह भी कहा कि कुछ गैर-गोपनीय जानकारियाँ रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए सार्वजनिक की जाएंगी।
पाकिस्तान यात्रा और उच्चायोग मुलाकात के आरोप
मुख्यमंत्री सरमा ने दावा किया, “मैं यह पुष्टि कर सकता हूँ कि असम के एक सांसद अपने पिता के मुख्यमंत्री रहते हुए पाकिस्तान गए थे।” गौरतलब है कि गोगोई के पिता तरुण गोगोई 2001 से 2016 तक असम के मुख्यमंत्री रहे।
सरमा ने यह भी आरोप लगाया कि गोगोई ने नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग जाकर तत्कालीन उच्चायुक्त अब्दुल बासित से मुलाकात की और पाकिस्तान यात्रा के दौरान उन्होंने सोशल मीडिया से दूरी बना ली थी। इसके अलावा, इस यात्रा की जानकारी केंद्र सरकार को नहीं दी गई।
पत्नी की नौकरी को लेकर दावे
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि गोगोई की पत्नी एलिज़ाबेथ कोलबोर्न मार्च 2011 से मार्च 2012 के बीच पाकिस्तान में कार्यरत थीं और पाकिस्तानी नागरिक अली तौकीर शेख के साथ पेशेवर संपर्क में थीं। शेख पर पाकिस्तान की योजना और आपदा प्रबंधन संस्थाओं में सलाहकार भूमिका निभाने का आरोप है।
सरमा के अनुसार, SIT ने पाया कि कोलबोर्न का संबंध LEAD Pakistan और Climate and Development Knowledge Network (CDKN) जैसे पाकिस्तान आधारित संगठनों से रहा है और उन्होंने अली तौकीर शेख के साथ संयुक्त शोध पत्र भी लिखे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि जांच शुरू होने के बाद शेख ने सोशल मीडिया से उनसे जुड़े पोस्ट हटा दिए।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि अली तौकीर शेख ने यूपीए सरकार के कार्यकाल में कई बार भारत का दौरा किया, लेकिन 2014 में एनडीए सरकार आने के बाद उन्होंने भारत आना बंद कर दिया।
उन्होंने कहा कि SIT को कुछ संवेदनशील जानकारियाँ मिली हैं, लेकिन फोन रिकॉर्ड और गोपनीय दस्तावेज़ हासिल करने का अधिकार केवल केंद्रीय एजेंसियों के पास है।
गौरव गोगोई का जवाब
गौरव गोगोई ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें “बेतुका, निराधार, पागलपन भरा और बेकार” बताया है। उन्होंने मुख्यमंत्री पर बिना तथ्यों के “आईटी सेल ट्रोल” की तरह व्यवहार करने का आरोप लगाया है।
हालांकि, गृह मंत्रालय को मामला सौंपे जाने के ताज़ा फैसले पर गोगोई की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
यह पूरा घटनाक्रम असम में सत्तारूढ़ भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव को और तेज़ करता दिख रहा है। मुख्यमंत्री सरमा ने यह भी आरोप लगाया कि गुवाहाटी स्थित कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन “असम विरोधी गतिविधियों” का अड्डा बन गया है और उन्होंने अपने तथा अपने परिवार के खिलाफ दिए गए बयानों को लेकर वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं पर मानहानि का मुकदमा दायर करने की बात कही है।
