ED की छापेमारी के दौरान ममता बनर्जी के बर्ताव पर हिमंत बिस्वा सरमा की कड़ी आलोचना
चिरौरी न्यूज
गुवाहाटी/कोलकाता: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कोलकाता में इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) से जुड़े ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के रवैये की तीखी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि छापेमारी स्थलों पर ममता बनर्जी का व्यवहार बेहद चिंताजनक था और इससे जनता के बीच उनकी छवि को नुकसान पहुंच सकता है।
शुक्रवार को गुवाहाटी में पत्रकारों से बातचीत करते हुए सरमा ने कहा, “जिस तरह से वह छापेमारी वाली जगहों पर व्यवहार कर रही थीं, क्राइम सीन पर उनका रवैया, सरकारी फाइलें अपने साथ ले जाना और गृह मंत्री के खिलाफ गलत भाषा का इस्तेमाल करना—ये सभी बातें बेहद गंभीर हैं। इस तरह के आचरण से जनता के बीच उनकी प्रतिष्ठा कम हो सकती है।”
उन्होंने आगे कहा, “मैं इस विषय पर और कुछ नहीं कहना चाहता, लेकिन यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि कोई मौजूदा मुख्यमंत्री इस तरह का व्यवहार करे, फाइलें जब्त करे और कथित तौर पर लोगों को हिरासत में ले। यह स्वीकार्य सीमाओं से बहुत आगे है।”
ED की कार्रवाई के बाद राजनीतिक घमासान
ये टिप्पणियां गुरुवार को I-PAC प्रमुख प्रतीक जैन के आवास और फर्म के कार्यालय में ED की तलाशी के बाद सामने आई हैं। छापेमारी के दौरान ममता बनर्जी अचानक मौके पर पहुंच गई थीं और आरोप लगाया था कि केंद्रीय एजेंसी अहम विधानसभा चुनावों से पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) का संवेदनशील डेटा जब्त करने की कोशिश कर रही है।
ED ने स्पष्ट किया है कि ये कार्रवाई कथित मल्टी-करोड़ रुपये के कोयला चोरी घोटाले की जांच का हिस्सा थी। एजेंसी ने ममता बनर्जी पर कानूनी जांच में बाधा डालने का आरोप लगाते हुए दावा किया कि उन्होंने और राज्य पुलिस ने छापेमारी के दौरान “अहम सबूत” जबरन हटाए।
अवैध अप्रवासन के मुद्दे पर भी हमला
हिमंत बिस्वा सरमा ने बांग्लादेश से हो रहे अवैध अप्रवासन के मुद्दे पर भी ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि इस गंभीर समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए राज्य में शासन परिवर्तन जरूरी है।
उन्होंने कहा, “बंगाल में बड़े स्तर पर काम करने की जरूरत है और इसके लिए हमारी पार्टी का वहां सरकार बनाना जरूरी है। बंगाल में हमारी टीम मजबूत है, उसे बस एक मौका चाहिए।”
सरमा ने आगे कहा, “त्रिपुरा और असम में विकास के काम हो रहे हैं, लेकिन बंगाल में ऐसा नहीं हो रहा। इसका एक बड़ा कारण अवैध बांग्लादेशी घुसपैठ से प्रभावी ढंग से न निपट पाना है।”
उन्होंने यह भी कहा कि यदि पश्चिम बंगाल में असम और त्रिपुरा की तरह सख्त नीति अपनाई जाए, तो हालात में सुधार संभव है।
