भारत ने निभाई मानवीय जिम्मेदारी: IRIS Dena पर हमले से कुछ दिन पहले ईरानी युद्धपोत को कोच्चि में दी सुरक्षित डॉकिंग

India fulfilled its humanitarian responsibility: Iranian warship was safely docked in Kochi a few days before the attack on Iris Denaचिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: हिंद महासागर में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच भारत ने मानवीय और जिम्मेदार समुद्री शक्ति की भूमिका निभाते हुए ईरान के एक युद्धपोत को सुरक्षित आश्रय दिया। दरअसल, ईरानी फ्रिगेट IRIS Dena पर अमेरिकी पनडुब्बी के हमले से कुछ दिन पहले ही भारत ने तकनीकी खराबी से जूझ रहे उसके सिस्टर वेसल IRIS Lavan को केरल के कोच्चि बंदरगाह पर डॉकिंग की अनुमति दी थी।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह फैसला जहाज़ में आई तकनीकी दिक्कतों और क्रू की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मानवीय आधार पर लिया गया, जिससे संकट के समय समुद्री सहयोग और जिम्मेदारी के प्रति भारत की प्रतिबद्धता भी सामने आई।

सूत्रों के मुताबिक, ईरान ने 28 फरवरी को भारत से संपर्क कर अपने नेवल वेसल IRIS लवन को कोच्चि में डॉक करने की अनुमति मांगी थी। तेहरान ने बताया था कि जहाज़ में तकनीकी दिक्कतें आ गई हैं और उन्हें तुरंत ठीक करने की आवश्यकता है। यह वही दिन था जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर संयुक्त सैन्य कार्रवाई शुरू की थी।

भारत ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मानवीय आधार पर 1 मार्च को डॉकिंग की अनुमति दे दी। इसके बाद IRIS लवन 4 मार्च को कोच्चि पहुंच गया। जहाज़ के 183 क्रू मेंबर्स को फिलहाल दक्षिणी बंदरगाह शहर में भारतीय नौसेना की सुविधाओं में ठहराया गया है, जहां उन्हें आवश्यक सहायता दी जा रही है।

सिस्टर वेसल IRIS डेना का समुद्र में हादसा

जहां IRIS लवन को समय पर सुरक्षित बंदरगाह मिल गया, वहीं उसका सिस्टर वेसल IRIS डेना इतनी किस्मत वाला नहीं रहा। यह जहाज़ विशाखापत्तनम में आयोजित एक सैन्य अभ्यास में भाग लेने के बाद ईरान लौट रहा था, तभी 4 मार्च को हिंद महासागर में एक अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा दागे गए टॉरपीडो से टकराने के बाद डूब गया।

यह घटना श्रीलंका के दक्षिणी तट पर स्थित गाले बंदरगाह से लगभग 40 नॉटिकल मील दूर अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में हुई। जहाज़ ने सुबह के समय एक डिस्ट्रेस कॉल जारी कर विस्फोट की जानकारी दी थी, लेकिन जब तक श्रीलंका के बचाव जहाज़ मौके पर पहुंचे, तब तक फ्रिगेट समुद्र में समा चुका था। इस हादसे में 80 से अधिक नाविकों के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है।

सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन

इस घटना के बाद भारतीय नौसेना ने भी तुरंत राहत और बचाव अभियान शुरू किया। नौसेना के अनुसार, फ्रिगेट से डिस्ट्रेस सिग्नल मिलने के तुरंत बाद खोज और बचाव अभियान सक्रिय किया गया।

श्रीलंका द्वारा पहले से चल रहे सर्च ऑपरेशन को तेज़ करने के लिए एक लंबी दूरी का समुद्री पेट्रोल विमान तैनात किया गया। इसके अलावा एयर-ड्रॉपेबल लाइफ राफ्ट से लैस एक अन्य विमान को स्टैंडबाय पर रखा गया था।

उस समय आसपास मौजूद भारतीय नौसेना का जहाज़ INS तरंगिनी भी तुरंत रेस्क्यू मिशन में सहायता के लिए मोड़ दिया गया। इसके अलावा एक और पोत INS इक्षक कोच्चि से रवाना किया गया, जो अब भी मानवीय आधार पर लापता नाविकों की तलाश में क्षेत्र में मौजूद है।

ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस घटना की कड़ी निंदा की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसे “समुद्र में ज़ुल्म” करार देते हुए कहा कि यह हमला बिना किसी चेतावनी के अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में किया गया।

उन्होंने कहा कि जहाज़, जिसमें लगभग 130 नाविक सवार थे, ईरान के तट से करीब 2,000 मील दूर अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में था। अराघची ने IRIS डेना को “भारत की नौसेना का मेहमान” बताते हुए चेतावनी दी कि इस कार्रवाई के लिए अमेरिका को भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।

अमेरिका ने हमले की पुष्टि की

दूसरी ओर, अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इस हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि यह टॉरपीडो से किया गया एक “शांत लेकिन प्रभावी” ऑपरेशन था। उनके अनुसार यह कार्रवाई ईरान के खिलाफ अमेरिका और इज़राइल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई के बाद चल रहे व्यापक सैन्य अभियान का हिस्सा है, जो अब मध्य पूर्व से आगे अन्य क्षेत्रों तक फैलता जा रहा है।

इस घटनाक्रम के बीच भारत ने स्पष्ट किया है कि उसकी प्राथमिकता समुद्री सुरक्षा, मानवीय सहायता और अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों का पालन करना है।

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