एशिया पावर इंडेक्स 2025 में भारत तीसरे स्थान पर, अमेरिका और चीन शीर्ष दो स्थानों पर कायम
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: ऑस्ट्रेलिया स्थित प्रतिष्ठित थिंक-टैंक लोवी इंस्टीट्यूट द्वारा जारी एशिया पावर इंडेक्स 2025 में भारत ने एशिया में तीसरा स्थान हासिल किया है। सूची में पहले स्थान पर अमेरिका और दूसरे पर चीन है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने अपने समकक्ष देशों की तुलना में काफी बेहतर प्रदर्शन किया है, हालांकि चीन के साथ रैंकिंग का अंतर अब भी बड़ा बना हुआ है।
रिपोर्ट की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि भारत की शक्ति लगातार बढ़ रही है और 2025 में देश ने पहली बार वह सीमा पार कर ली है जिसे इंडेक्स में “मेजर पावर” का दर्जा माना जाता है।
एशिया पावर इंडेक्स के सातवें संस्करण में एशिया के 27 देशों और क्षेत्रों की ताकत का मूल्यांकन 131 संकेतकों और आठ मुख्य आयामों के आधार पर किया गया है। इनमें सैन्य क्षमता, रक्षा नेटवर्क, आर्थिक ताकत, आर्थिक संबंध, कूटनीतिक प्रभाव, सांस्कृतिक प्रभाव, लचीलापन और भविष्य की संसाधन क्षमता शामिल हैं।
अमेरिका और चीन का दबदबा बरकरार
अमेरिका: 81.7 अंकों के साथ शीर्ष पर, एशिया में सबसे प्रभावशाली शक्ति।
चीन: 73.7 अंकों के साथ दूसरा स्थान, जिसमें 2025 में 1% की बढ़त दर्ज की गई।
भारत: 40 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर
भारत ने 40 अंक हासिल किए हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 2% की बढ़त दर्शाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार भारत की बढ़ती आर्थिक शक्ति, कोविड के बाद मजबूत रिकवरी और बढ़ता भू-राजनीतिक प्रभाव इसकी रैंकिंग में सुधार के प्रमुख कारण हैं।
लोवी इंस्टीट्यूट ने कहा, “भारत की आर्थिक और सैन्य क्षमता 2025 के संस्करण में बढ़ी है। इसकी अर्थव्यवस्था ने मजबूत वृद्धि जारी रखी है और अंतरराष्ट्रीय प्रासंगिकता—कनेक्टिविटी, तकनीक और वैश्विक प्रभाव—के लिहाज से भी प्रगति की है। भारत की सैन्य क्षमता भी लगातार बेहतर हो रही है।”
रूस: 2019 के बाद पहली बार एशिया में अपनी शक्ति सुधारते हुए दिख रहा है, विशेषकर उत्तर कोरिया और चीन जैसी साझेदारियों के चलते।
जापान: अपनी रैंकिंग को स्थिर बनाए हुए है, हालांकि कई सूचकांकों में नकारात्मक संकेत मिले हैं।
दक्षिण-पूर्व एशिया के देश: व्यापक शक्ति में हल्की बढ़त दर्ज की गई है।
ऑस्ट्रेलिया: दीर्घकालिक तौर पर अपनी शक्ति बनाए रखने की चुनौती झेल रहा है।
चीन बनाम अमेरिका: रिपोर्ट के अनुसार चीन अमेरिका के साथ शक्ति अंतर को धीरे-धीरे कम कर रहा है, हालांकि अभी भी अमेरिका स्पष्ट रूप से आगे है।
