एआई सदी में भारत की छाप होनी चाहिए: जीत अदाणी

India should have its mark in the AI ​​century: Jeet Adaniचिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: भारत की तकनीकी महत्वाकांक्षाओं को नई दिशा देते हुए, जीत अदाणी, निदेशक, अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड, ने गुरुवार को स्पष्ट शब्दों में कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के युग में भारत की भूमिका केवल सहभागी की नहीं, बल्कि निर्माता और मार्गदर्शक की होनी चाहिए। एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में बोलते हुए उन्होंने जोर दिया कि असली सवाल यह नहीं है कि भारत एआई सदी का हिस्सा बनेगा या नहीं, बल्कि यह है कि क्या यह सदी भारत की बौद्धिक क्षमता, उसके मानकों और उसके मूल्यों की छाप के साथ आगे बढ़ेगी।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि यद्यपि भारत की सूचना प्रौद्योगिकी क्रांति ने उसे वैश्विक डिजिटल सेवाओं का शक्ति केंद्र बनाया, लेकिन उस उत्पादकता का बड़ा हिस्सा देश के बाहर सिमट गया — और अब एआई क्रांति भारत के लिए उस संतुलन को बदलने का ऐतिहासिक अवसर लेकर आई है।

उन्होंने कहा, “एआई क्रांति भारत को उस समीकरण को बदलने का सदी में एक बार मिलने वाला अवसर देती है। हमें यह तय करना है कि हम केवल तकनीक का उपयोग करेंगे या उसके निर्माता भी बनेंगे।”

समिट को “इतिहास का एक निर्णायक मोड़” बताते हुए जीत अडानी ने कहा कि एआई सॉवरेनिटी वैश्विक शक्ति संतुलन को पुनर्परिभाषित करने जा रही है।

उन्होंने प्रश्न उठाया, “क्या भारत बुद्धिमत्ता आयात करेगा या उसका निर्माण करेगा? क्या हम उत्पादकता का केवल उपभोग करेंगे या उसे सृजित भी करेंगे? क्या हम किसी और के सिस्टम से जुड़ेंगे या अपना सिस्टम बनाएंगे?”

उन्होंने भारत की एआई सदी को परिभाषित करने वाले तीन प्रमुख स्तंभों का उल्लेख किया जिसमें ऊर्जा संप्रभुता, कंप्यूट और क्लाउड संप्रभुता, सेवा संप्रभुता प्रमुख हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये केवल तकनीकी अवधारणाएं नहीं हैं, बल्कि आधुनिक राष्ट्रवाद की आधारशिला हैं।

जीत अदाणी ने कहा कि यदि किसी देश की ऊर्जा व्यवस्था कमजोर है, तो उसकी बुद्धिमत्ता प्रणाली भी कमजोर होगी। आज के एआई युग में पावर ग्रिड और डेटा ग्रिड को अलग नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि भारत का नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार, सौर, पवन और ऊर्जा भंडारण, अब केवल जलवायु नीति नहीं, बल्कि एक रणनीतिक अवसंरचना नीति है। “ऊर्जा सुरक्षा ही बुद्धिमत्ता सुरक्षा है। और सतत ऊर्जा प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त बन जाती है,” उन्होंने कहा।

जीत अदाणी ने बताया कि इस सप्ताह की शुरुआत में गौतम अदाणी, अध्यक्ष, अदाणी समूह, ने देश के लिए एक संप्रभु, हरित-ऊर्जा संचालित एआई अवसंरचना मंच बनाने हेतु 100 अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की है।

उन्होंने कहा, “यह केवल डेटा केंद्रों का विस्तार नहीं है। यह 5 गीगावाट क्षमता वाले, 250 अरब डॉलर के एकीकृत ऊर्जा और कंप्यूट पारिस्थितिकी तंत्र की शुरुआत है, जिसे भारत की बुद्धिमत्ता क्रांति को गति देने के लिए तैयार किया गया है।”

उन्होंने जोर देकर कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रिड सुदृढ़ता और हाइपरस्केल कंप्यूट को एकीकृत संरचना में जोड़कर यह पहल सुनिश्चित करेगी कि भारत का एआई भविष्य न केवल ऊर्जावान हो, बल्कि सुरक्षित, संप्रभु और राष्ट्रीय स्तर पर निर्मित भी हो।

अपने संबोधन के अंत में जीत अदाणी ने कहा कि एआई को पहले भारतीय नागरिकों के लिए शक्ति गुणक बनना चाहिए, न कि केवल वैश्विक लाभ का साधन। उन्होंने कहा, “हमें सुनिश्चित करना होगा कि भारत केवल एआई युग का सहभागी न बने, बल्कि उसका शिल्पकार भी बने।”

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