भारत ने रूस के साथ व्यापार पर NATO महासचिव की चेतावनी पर जताई कड़ी आपत्ति

चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: भारत ने NATO महासचिव मार्क रूटे द्वारा रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों पर आर्थिक प्रतिबंध की चेतावनी पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय ने दोहरे मापदंड अपनाने के खिलाफ सख्त संदेश देते हुए कहा कि देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने गुरुवार को साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में कहा, “हमने इस विषय पर रिपोर्ट देखी है और घटना पर नजर रखी जा रही है। मैं दोहराना चाहूंगा कि हमारे लोगों की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करना हमारी प्रमुख प्राथमिकता है। हम बाज़ार में उपलब्धता और वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर निर्णय लेते हैं। इस संदर्भ में हम किसी भी प्रकार के दोहरे मापदंडों के खिलाफ सावधानी बरतने की सलाह देते हैं।”
NATO महासचिव मार्क रूटे ने वॉशिंगटन दौरे के दौरान कहा था कि यदि भारत, चीन और ब्राज़ील रूस से व्यापार जारी रखते हैं और शांति वार्ता को गंभीरता से नहीं लिया जाता, तो उन पर 100 प्रतिशत सेकेंडरी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
इस बीच, केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने ‘ऊर्जा वार्ता 2025’ कार्यक्रम में स्पष्ट किया कि भारत ने अपने तेल आपूर्तिकर्ताओं में विविधता लाई है, जिससे किसी एक देश पर निर्भरता कम हो गई है।
पुरी ने कहा, “भारत अब 40 देशों से तेल खरीदता है, जबकि 2007 में यह संख्या 27 थी। बाजार में भरपूर तेल उपलब्ध है। ईरान और वेनेजुएला पर फिलहाल प्रतिबंध हैं, लेकिन क्या ये हमेशा रहेंगे? ब्राजील, कनाडा जैसे देश उत्पादन बढ़ा रहे हैं। हमें सप्लाई को लेकर कोई खास चिंता नहीं है।”
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर प्रतिबंध की चेतावनी देने पर प्रतिक्रिया देते हुए पुरी ने कहा,
“मैंने ऐसी धमकियां सुनी हैं। कई बार बयान इसलिए दिए जाते हैं ताकि विवाद सुलझाया जा सके।”
उन्होंने बताया कि भारत-रूस तेल व्यापार से वैश्विक तेल बाजार स्थिर बना रहा है।
“यदि भारत ने रूस से तेल नहीं खरीदा होता, तो कच्चे तेल की कीमतें $130 प्रति बैरल तक पहुंच सकती थीं। युद्ध शुरू होने से पहले भारत रूस से केवल 0.2 प्रतिशत तेल खरीदता था, जो अब करीब 40 प्रतिशत तक पहुंच गया है।”
पुरी ने स्पष्ट किया कि भारत प्रतिबंधित देशों से तेल नहीं खरीदता और रूसी तेल हमेशा $60 प्रति बैरल की कैप के तहत रहा है, न कि प्रतिबंध के दायरे में।
उन्होंने कहा, “रूस प्रतिदिन 9 मिलियन बैरल से अधिक कच्चे तेल का उत्पादन करता है। यदि यह आपूर्ति बाजार से हट जाए तो वैश्विक स्तर पर भारी उथल-पुथल मच सकती है और कीमतें आसमान छू सकती हैं।”
भारत ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि उसकी ऊर्जा सुरक्षा सर्वोपरि है और वह किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं है।
