भारत-अमेरिका व्यापार समझौता होने से किसानों को कोई खतरा नहीं, विपक्ष भ्रम फैला रहा: कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच एक ऐतिहासिक व्यापार समझौता अंतिम रूप लेने के करीब है, जो दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई मजबूती देगा। केंद्र सरकार ने बुधवार को स्पष्ट किया कि इस समझौते में भारत के संवेदनशील कृषि और डेयरी क्षेत्रों के हितों से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया गया है। सरकार ने दोहराया कि यह करार भारतीय किसानों के लिए नए निर्यात अवसर खोलेगा, न कि जोखिम पैदा करेगा।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष के उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि प्रस्तावित भारत–अमेरिका व्यापार समझौता घरेलू किसानों को नुकसान पहुंचा सकता है। नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत करते हुए चौहान ने कहा कि यह समझौता छोटे और बड़े सभी किसानों के हितों की पूरी तरह रक्षा करता है और इससे भारत के खाद्यान्न, मोटे अनाज, फल या डेयरी उत्पादों को “किसी भी प्रकार का खतरा नहीं” है।
उन्होंने कहा, “किसानों के हित सर्वोपरि हैं और उन पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता। इस समझौते में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिससे विदेशी कृषि उत्पाद अचानक या बाधक तरीके से भारतीय बाजार में प्रवेश कर सकें।” उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी प्रमुख फसलें, खाद्यान्न, फल और डेयरी उत्पाद पूरी तरह सुरक्षित हैं और कृषि से जुड़े मौजूदा संरक्षण उपाय बरकरार रहेंगे।
कृषि मंत्री ने यह भी कहा कि यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में तैयार किया गया है और यह भारत की उस कूटनीतिक सोच को दर्शाता है, जो विकास, सम्मान और राष्ट्रीय हित पर आधारित है। चौहान ने कहा, “प्रधानमंत्री ने शुरू से ही स्पष्ट कर दिया था कि किसानों के कल्याण से कोई समझौता नहीं होगा। यह समझौता भारतीय कृषि के लिए अवसर लेकर आता है, जोखिम नहीं।”
अमेरिकी अधिकारियों के एक हालिया सोशल मीडिया पोस्ट के बाद पैदा हुई चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए चौहान ने कहा कि वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल पहले ही संसद में स्थिति स्पष्ट कर चुके हैं। उन्होंने दोहराया कि भारत ने अपने बाजार ऐसे किसी भी तरीके से नहीं खोले हैं, जिससे घरेलू किसानों पर दबाव पड़े या उन्हें अनुचित प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़े।
सरकार ने इस समझौते से होने वाले संभावित निर्यात लाभों पर भी प्रकाश डाला। शुल्कों में कमी से चावल, मसाले और वस्त्र जैसे क्षेत्रों में भारत के निर्यात को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। चौहान ने बताया कि भारत पहले से ही अमेरिका सहित कई देशों को चावल का निर्यात करता है और हाल ही में चावल निर्यात लगभग 63,000 करोड़ रुपये तक पहुंचा है। वहीं वस्त्र निर्यात में वृद्धि से देशभर के लाखों कपास किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।
इस समझौते को लेकर सरकार के रुख को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी मजबूती दी। अमेरिका दौरे के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर उन्होंने कहा कि भारत–अमेरिका व्यापार समझौता अब अंतिम चरण में है और बहुत जल्द पूरा हो जाएगा। उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का आतिथ्य के लिए आभार जताते हुए बातचीत को सकारात्मक और फलदायी बताया।
जयशंकर ने कहा, “यह ऐतिहासिक भारत–अमेरिका व्यापार समझौता द्विपक्षीय संबंधों के एक नए दौर की शुरुआत करेगा, जिसमें सहयोग की अपार संभावनाएं हैं।” उन्होंने यह भी संकेत दिया कि महत्वपूर्ण खनिजों, रणनीतिक मुद्दों, रक्षा और ऊर्जा के क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग और तेज होगा।
सरकारी अधिकारियों का मानना है कि यह समझौता वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में भारत–अमेरिका आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। हालांकि समझौते का विस्तृत विवरण समय आने पर साझा किया जाएगा, लेकिन सरकार ने साफ किया है कि इसका मूल सिद्धांत अपरिवर्तित है—भारतीय किसानों का कल्याण।
भावुक अपील करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने किसानों को देश का “अन्नदाता” बताते हुए कहा कि उनकी सेवा करना पूजा के समान है। उन्होंने कहा, “किसानों का कल्याण ही देश का कल्याण है,” और भरोसा दिलाया कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सरकार हर कदम पर किसानों के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी, जब भारत अमेरिका के साथ अपने व्यापारिक संबंधों में एक नया अध्याय शुरू कर रहा है।
