देसी मवेशी, भैंस, मुर्गी और छोटे पशु देश की कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़: शिवराज सिंह चौहान
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने देसी पशु नस्लों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि देसी मवेशी, भैंस, मुर्गी और छोटे पशु देश की कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। उन्होंने कहा कि इन पशुओं का संरक्षण और संवर्धन न केवल किसानों की आय और आजीविका से जुड़ा है, बल्कि यह सतत कृषि, ग्रामीण मजबूती और जैव विविधता के संरक्षण के लिए भी बेहद आवश्यक है।
शिवराज सिंह चौहान मुख्य अतिथि के रूप में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भाकृअनुप) द्वारा नई दिल्ली स्थित ए. पी. शिंदे ऑडिटोरियम में पशु नस्ल पंजीकरण प्रमाणपत्र एवं नस्ल संरक्षण पुरस्कार वितरण कार्यक्रम में शामिल हुए। केंद्रीय मंत्री ने पशुओं की पारिस्थितिक (इकोलॉजिकल) भूमिका और भारत की देसी पशु नस्लों के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत में पशुओं के साथ संबंध केवल आर्थिक या पोषण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गहराई से पारिस्थितिकी से जुड़ा हुआ है। उनके अनुसार, इस संतुलन में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी का सीधा असर पर्यावरण और अंततः पृथ्वी की भलाई पर पड़ता है।
उन्होंने देसी नस्लों के संरक्षण के लिए देशभर में कार्य कर रहे वैज्ञानिकों, संस्थानों और किसान समुदायों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ये प्रयास केवल पशु संरक्षण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जैव विविधता की रक्षा, ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने और सतत कृषि के भविष्य को सुरक्षित करने में भी अहम भूमिका निभा रहे हैं।
देसी पशु नस्लों के संरक्षण के लिए वर्ष 2019 में शुरू की गई राष्ट्रीय पहल का उल्लेख करते हुए मंत्री ने इसे एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि देसी मवेशी, भैंस, मुर्गी और छोटे जुगाली करने वाले पशु देश की कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और उनका विकास सीधे तौर पर किसानों की समृद्धि, स्थिरता और आय सुरक्षा से जुड़ा है।
उन्होंने इस पहल को नीति और सम्मेलनों से आगे बढ़ाकर एक जन आंदोलन बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनके अनुसार, यह प्रयास गांवों, खेतों और किसान परिवारों तक पहुंचना चाहिए, ताकि इसका व्यापक और दीर्घकालिक प्रभाव सुनिश्चित हो सके। साथ ही, उन्होंने संरक्षण के क्षेत्र में योगदान देने वालों को पहचान देने और मीडिया से सकारात्मक प्रयासों को अधिक प्रमुखता देने की अपील की।
भाकृअनुप के महानिदेशक डॉ. जाट ने कहा कि “विकसित भारत – पशुधन” का दृष्टिकोण दीर्घकालिक संरक्षण के साथ संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग पर केंद्रित है। उन्होंने बताया कि पिछले 15 वर्षों में किसानों की सक्रिय भागीदारी से 242 पशु नस्लों का पंजीकरण किया गया है। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए, परिषद का उद्देश्य सभी देसी पशु नस्लों का शत-प्रतिशत पंजीकरण करना है।
डॉ. जाट ने भैंसों की तुलना में मवेशियों की घटती आबादी पर चिंता व्यक्त की और इस दिशा में सुधार की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि नस्ल पंजीकरण केवल संरक्षण का माध्यम नहीं है, बल्कि यह जैविक संसाधनों पर संप्रभु अधिकार, किसानों के लिए लाभ-साझेदारी और बौद्धिक संपदा अधिकारों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करता है। “जीरो नॉन-डिस्क्रिप्ट एनिमल्स मिशन” इन्हीं उद्देश्यों को आगे बढ़ा रहा है।
कार्यक्रम में भाकृअनुप के उप-महानिदेशक (पशुविज्ञान) डॉ. राघवेंद्र भट्टा ने प्रतिनिधियों का स्वागत किया और पंजीकृत नस्लों की जानकारी साझा करते हुए उनके संरक्षण को सतत पर्यावरण के लिए आवश्यक बताया।
इस अवसर पर नई पहचानी गई पशु एवं पोल्ट्री नस्लों को पंजीकरण प्रमाणपत्र प्रदान किए गए और किसानों, प्रजनकों तथा संस्थानों को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए नस्ल संरक्षण पुरस्कार से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में पशुधन क्षेत्र को मजबूत करने, किसानों की आय बढ़ाने और जैव विविधता संरक्षण के माध्यम से सतत कृषि को बढ़ावा देने के राष्ट्रीय दृष्टिकोण को रेखांकित किया गया।
नस्ल संरक्षण पुरस्कार 2025
भाकृअनुप ने स्वदेशी पशु नस्लों के संरक्षण में उत्कृष्ट योगदान के लिए वर्ष 2025 के नस्ल संरक्षण पुरस्कार प्रदान किए।
व्यक्तिगत श्रेणी में
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लुइट भैंस के संरक्षण के लिए जीतुल बुरागोहेन को प्रथम पुरस्कार
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पुंगनूर मवेशियों के संरक्षण के लिए कुडाला राम दास को द्वितीय पुरस्कार
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तिरुपति और रामचंद्रन काहनार को सांत्वना पुरस्कार
संस्थागत श्रेणी में
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बिनझारपुरी मवेशियों के संरक्षण के लिए बिनझारपुरी मवेशी प्रमोटर्स एंड प्रोड्यूसर्स सोसाइटी को प्रथम पुरस्कार
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पुलिक्कुलम मवेशियों के संरक्षण के लिए तमिलनाडु पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय को द्वितीय पुरस्कार
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गाओलाओ मवेशियों के संरक्षण के लिए तृतीय पुरस्कार
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मेचेरी भेड़ के संरक्षण में योगदान के लिए तमिलनाडु पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय को सांत्वना पुरस्कार
इस कार्यक्रम में देशभर से वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक, शोधकर्ता, प्रगतिशील किसान और अन्य हितधारकों ने भाग लिया।
