‘जय सोमनाथ’ की घोषणा: संजय लीला भंसाली का अगला भव्य ऐतिहासिक प्रोजेक्ट 2027 में रिलीज़ होगा
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: प्रख्यात फिल्ममेकर संजय लीला भंसाली ने अपने अगले महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट ‘जय सोमनाथ’ की आधिकारिक घोषणा कर दी है। यह फिल्म 2027 में दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी। फिल्म की घोषणा के साथ एक प्रभावशाली पंक्ति, “मंदिर तोड़ा जा सकता है, आस्था नहीं”, ने साफ संकेत दे दिया है कि यह एक भव्य, भावनात्मक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित ड्रामा होगा।
केतन मेहता के साथ खास सहयोग
इस फिल्म को चर्चित निर्देशक केतन मेहता निर्देशित करेंगे, जबकि इसे भंसाली प्रोडक्शंस के बैनर तले प्रस्तुत किया जाएगा। यह सहयोग खास इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि दोनों फिल्ममेकर अपने-अपने अंदाज़ में बड़े कैनवास, गहरी मानवीय भावनाओं और ऐतिहासिक विषयों को प्रभावशाली ढंग से पर्दे पर उतारने के लिए जाने जाते हैं।
केतन मेहता ने अपने करियर में कई ऐतिहासिक और सामाजिक विषयों पर आधारित फिल्में बनाई हैं, जिनमें मानवीय संवेदनाओं और इतिहास का संतुलित मेल देखने को मिलता है। वहीं, भंसाली अपने भव्य सेट, दमदार संगीत और गहन भावनात्मक प्रस्तुति के लिए मशहूर हैं। ऐसे में ‘जय सोमनाथ’ से दर्शकों की उम्मीदें स्वाभाविक रूप से काफी बढ़ गई हैं।
इतिहास और आस्था की कहानी
हालांकि फिल्म की कहानी को लेकर अभी विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है, लेकिन शीर्षक और टैगलाइन से स्पष्ट है कि इसकी पृष्ठभूमि ऐतिहासिक होगी। ‘सोमनाथ’ नाम सुनते ही गुजरात स्थित प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर की याद आती है, जो भारतीय सांस्कृतिक विरासत और आस्था का प्रतीक माना जाता है।
सोमनाथ मंदिर ने सदियों के दौरान कई आक्रमणों और पुनर्निर्माणों का इतिहास देखा है। ऐसे में फिल्म का विषय आस्था, संघर्ष और पुनर्निर्माण की भावना के इर्द-गिर्द घूमता हुआ प्रतीत होता है।
म्यूज़िक और प्रोडक्शन की भव्य तैयारी
यह प्रोजेक्ट भंसाली प्रोडक्शंस के साथ माया मूवीज़ और सारेगामा को भी एक साथ ला रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि फिल्म का संगीत इसकी आत्मा होगा। भंसाली स्वयं अपने संगीतबद्ध गीतों और भव्य बैकग्राउंड स्कोर के लिए पहचाने जाते हैं, इसलिए ‘जय सोमनाथ’ में भी संगीत की अहम भूमिका होने की संभावना है।
फिल्म की रिलीज़ 2027 के लिए तय की गई है, जो यह दर्शाती है कि निर्माता जल्दबाज़ी के बजाय गहन रिसर्च, भव्य सेट निर्माण और सावधानीपूर्वक कास्टिंग पर ध्यान दे रहे हैं। भंसाली के पिछले प्रोजेक्ट्स को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा सकता है कि आने वाले समय में फिल्म की स्टार कास्ट, लोकेशन और अन्य तकनीकी पहलुओं को लेकर बड़ी घोषणाएं की जाएंगी।
फिलहाल इतना तय है कि ‘जय सोमनाथ’ खुद को सिर्फ एक ऐतिहासिक फिल्म नहीं, बल्कि अटूट विश्वास और सांस्कृतिक पहचान की कहानी के रूप में प्रस्तुत कर रही है। एक ऐसी कहानी जो यह संदेश देती है कि इमारतें गिराई जा सकती हैं, लेकिन आस्था नहीं।
