झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन की अचानक दिल्ली यात्रा से सियासत गर्म, महागठबंधन में बढ़ी कड़वाहट
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली/रांची: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अचानक दिल्ली यात्रा और भारतीय जनता पार्टी नेतृत्व से संभावित मुलाकात की अटकलों ने राज्य की सियासत में हलचल तेज कर दी है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब बिहार विधानसभा चुनावों के दौरान महागठबंधन के भीतर मतभेद सार्वजनिक रूप से उभरकर सामने आए थे।
महागठबंधन में बढ़ती दरारें
सोरेन की पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा ने बिहार चुनावों में आदिवासी बहुल सीटों पर लड़ने की इच्छा जताई थी, लेकिन सीट बंटवारे पर कोई सहमति नहीं बन सकी। अंततः JMM ने चुनाव से दूरी बना ली। इसके बाद JMM नेताओं ने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेतृत्व पर “राजनीतिक अपरिपक्वता” और “छल” जैसे आरोप लगाए थे।
JMM के महासचिव सुप्रिय भट्टाचार्य ने गठबंधन में “विरोधाभास” की बात कहकर झारखंड में गठबंधन की “समीक्षा” की चेतावनी दी थी।
तेजस्वी यादव पर बढ़ी दबाव की घड़ी
आरजेडी नेता और बिहार के विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव के लिए यह संभावित राजनीतिक फेरबदल बड़ी चुनौती बन सकता है। बिहार चुनावों के नतीजे और महागठबंधन में गहराते तनाव ने पहले ही उनके अंदरूनी और बाहरी दबाव बढ़ा दिए हैं।
2024 के झारखंड विधानसभा चुनावों में JMM ने 81 में से 43 सीटों पर चुनाव लड़ा था, जबकि कांग्रेस को 30 और आरजेडी व वाम दलों को कुल 11 सीटें मिलीं। JMM ने 34, कांग्रेस ने 16, आरजेडी ने 4 और भाकपा(माले) ने 2 सीटें जीती थीं। घाटसिला उपचुनाव में JMM की जीत के बाद मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें थीं, पर सोरेन ने आरजेडी के एकमात्र मंत्री को बरकरार रखा।
कांग्रेस को लेकर भी लंबे समय से असंतोष रहा है और उसके भीतर टूट की चर्चा तेज है। यदि ऐसा हुआ तो कम से कम 11 विधायकों के अलग होने पर ही वे दलबदल कानून से बच सकेंगे।
वहीं, NDA के पास फिलहाल 24 सीटें हैं, जिनमें BJP की हिस्सेदारी 21 है।
कानूनी दबाव और रणनीति में बदलाव?
सोरेन पहले से ही कथित भू-कांड मामले में ED जांच का सामना कर रहे हैं। वर्ष 2024 में गिरफ्तारी के बाद उन्होंने इस्तीफा भी दिया था, लेकिन जमानत मिलने पर फिर से सत्ता में लौट आए।
अब केंद्र सरकार द्वारा संसद में पेश किए गए नए विधेयक, जिसमें मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री को गिरफ्तारी के 31वें दिन पद छोड़ना अनिवार्य होगा, ने सोरेन के लिए चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति को भेजा गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सोरेन का इंडिया ब्लॉक से दूरी बनाना और BJP से संभावित नजदीकी, कानूनी दबाव को कम करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
