कानपुर लैंबॉर्गिनी हादसा: FIR में ड्राइवर का नाम न होने पर सवाल, पुलिस कार्रवाई पर उठी उंगलियां

Kanpur Lamborghini accident: Questions raised over driver's name missing from FIR, police action under scrutiny.
(Screengrabs of Social Media Video)

चिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के कानपुर में लैंबॉर्गिनी कार से जुड़े सड़क हादसे के मामले ने तूल पकड़ लिया है। पुलिस द्वारा FIR दर्ज किए जाने के बावजूद, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दिख रहे कथित ड्राइवर का नाम केस पेपर्स में शामिल न होने को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। घटना के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली, थाने में कार को ढकने और निजी बॉडीगार्ड्स की मौजूदगी ने भी विवाद को और गहरा कर दिया है।

रविवार शाम को हुआ हादसा, पैदल यात्री घायल

पुलिस के मुताबिक, रविवार शाम कानपुर के ग्वाल टोली इलाके के पास एक लैंबॉर्गिनी कार अनियंत्रित होकर सड़क से उतर गई और फुटपाथ पर खड़े लोगों को टक्कर मार दी। इस दौरान तौफीक अहमद नाम के एक पैदल यात्री को गंभीर चोटें आईं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों के अनुसार, उनकी हालत फिलहाल स्थिर है। हादसे में कार ने एक ऑटो-रिक्शा को भी टक्कर मारी थी।

पुलिस ने शुरुआती बयान में कहा कि ड्राइवर को गाड़ी चलाते समय चक्कर आए और उसे दौरा पड़ा, जिससे वाहन से नियंत्रण खो गया। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि इतनी महंगी और तेज़ रफ्तार कार के मामले में नतीजे कहीं ज़्यादा गंभीर हो सकते थे। एक स्थानीय निवासी ने कहा, “अगर यह कार तेज़ स्पीड में होती, तो कई जानें जा सकती थीं।”

वीडियो में दिखा आरोपी, FIR में नाम गायब

हादसे के तुरंत बाद कई वीडियो सामने आए, जिनमें एक व्यक्ति को दुर्घटनाग्रस्त लैंबॉर्गिनी से बाहर निकलते हुए देखा गया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, उसकी पहचान तंबाकू व्यापारी ए.के. मिश्रा के बेटे शिवम के रूप में की गई है।

इसके बावजूद, दर्ज FIR में उसका नाम शामिल नहीं किया गया है, जिसे लेकर अब बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पुलिस ने वीडियो की मौजूदगी को स्वीकार किया है, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कथित ड्राइवर का नाम FIR में क्यों नहीं जोड़ा गया।

डीसीपी सेंट्रल अतुल श्रीवास्तव ने कहा कि एक शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया, “कार को जब्त कर लिया गया है और मामले की जांच जारी है,”

हालांकि FIR में नाम न होने को लेकर पूछे गए सवालों पर उन्होंने कोई सीधा जवाब नहीं दिया।

हादसे के बाद जब लैंबॉर्गिनी को पुलिस स्टेशन लाया गया, तो वहां से सामने आए दृश्य और अधिक विवादास्पद साबित हुए। वीडियो में देखा गया कि पुलिस परिसर के भीतर लग्जरी कार को चादर से ढक दिया गया, कथित तौर पर पुलिसकर्मियों के निर्देश पर। मौके पर मौजूद लोग इस कदम का विरोध करते हुए कार को ढकने से रोकने की कोशिश करते दिखे।

इन्हीं विजुअल्स में आरोपी से जुड़े निजी बाउंसर कार के पास खड़े होकर उसकी सुरक्षा करते नजर आए। पीड़ितों के परिजनों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि इन बाउंसरों ने पुलिस स्टेशन के अंदर उनके साथ बदसलूकी की, वह भी पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में, लेकिन किसी ने हस्तक्षेप नहीं किया।

घायल व्यक्ति का इलाज चल रहा था, जबकि एक लग्जरी कार को ढककर सुरक्षा दी जा रही थी—इस दृश्य ने पुलिस पर “खास ट्रीटमेंट” देने के आरोपों को और हवा दे दी है।

ड्राइवर के मेडिकल दावे की जांच जारी

पुलिस का कहना है कि ड्राइवर को दौरा पड़ने की वजह से हादसा हुआ। डीसीपी अतुल श्रीवास्तव ने बताया कि इस दावे की मेडिकल जांच की जा रही है।

उन्होंने कहा, “हम यह जांच कर रहे हैं कि संबंधित व्यक्ति को पहले से इस तरह की कोई मेडिकल हिस्ट्री है या नहीं।”

साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि ड्राइवर को इस तरह की स्वास्थ्य समस्या थी, तो वह हाई-परफॉर्मेंस स्पोर्ट्स कार कैसे चला रहा था।

घायल तौफीक अहमद का बयान

घायल पैदल यात्री तौफीक अहमद ने पुलिस को बताया कि वह फुटपाथ पर खड़ा था, तभी अचानक कार उसकी ओर आ गई। फिलहाल उसका इलाज जारी है और वह खतरे से बाहर बताया जा रहा है।

उसके परिवार ने मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है। परिवार का कहना है कि वायरल वीडियो और पुलिस स्टेशन में कार के साथ किया गया व्यवहार इस बात का संकेत है कि इस हादसे को एक सामान्य सड़क दुर्घटना की तरह नहीं देखा जा रहा।

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