ममता बनर्जी का चुनाव आयोग पर तीखा हमला: ‘CEC ने झूठ का पुलिंदा बनाया, हमारे साथ दुर्व्यवहार किया’

Mamata Banerjee launches scathing attack on Election Commission: 'The CEC has created a bundle of lies, they have mistreated us.'
( File Photo, Pic credit: Twitter)

चिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार से करीब 90 मिनट की बैठक के बाद चुनाव आयोग पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाए जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव आयोग भाजपा के इशारे पर काम कर रहा है।

बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि बंगाल में नामों की वर्तनी में मामूली अंतर या उपनाम (टाइटल) बदलने के आधार पर मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं। उन्होंने कहा, “बंगाल में बनर्जी और बंद्योपाध्याय, मुखर्जी और मुखोपाध्याय, चटर्जी और चट्टोपाध्याय जैसे नाम आम हैं। यहां लोग उपनाम बदलते रहते हैं, लेकिन इन्हें ‘गड़बड़ी’ बताकर नाम हटा दिए जा रहे हैं।”

मुख्यमंत्री ने दावा किया कि करीब 58 लाख मतदाताओं के नाम बिना किसी सुनवाई के हटा दिए गए। “न उनसे पूछा गया, न उन्हें मौका दिया गया,” उन्होंने कहा। ममता ने यह भी आरोप लगाया कि बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) पर दबाव बनाया जा रहा है और इस प्रक्रिया में अनुसूचित जाति और अल्पसंख्यक समुदाय के लोग प्रभावित हो रहे हैं। “क्या एससी और अल्पसंख्यक इंसान नहीं हैं?” उन्होंने सवाल किया।

‘चुनाव से पहले ही क्यों SIR?’

SIR के समय पर सवाल उठाते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि चुनाव से ठीक पहले इस तरह की कवायद क्यों की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासित असम में यह प्रक्रिया नहीं की गई, जबकि पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अन्य राज्यों में जिन दस्तावेजों को मान्य किया गया, बंगाल के लिए नियम बदल दिए गए।

अपना हमला और तेज करते हुए ममता ने कहा, “यह चुनाव आयोग नहीं है, यह भाजपा का एजेंट है।”

बैठक से बाहर निकलीं ममता

ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि बैठक के दौरान उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ, जिसके बाद उन्होंने बैठक का बहिष्कार कर बाहर निकलने का फैसला किया। “हमें अपमानित किया गया। हम न्याय मांगने आए थे, लेकिन हमें झूठ और अन्याय दिया गया,” उन्होंने कहा। उन्होंने चुनाव आयोग पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन करने और मीडिया पर पाबंदियां लगाने का भी आरोप लगाया।

चुनाव आयोग का पक्ष

वहीं, बैठक से जुड़े सूत्रों के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त ने तृणमूल कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि कानून का शासन सर्वोपरि है। आयोग ने यह भी कहा कि SIR कार्य में लगे अधिकारियों पर किसी भी तरह का दबाव, धमकी या हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

सूत्रों का दावा है कि आयोग ने तृणमूल नेताओं के कथित धमकी भरे और अपमानजनक बयानों, साथ ही कुछ स्थानों पर ERO कार्यालयों में तोड़फोड़ की घटनाओं का भी मुद्दा उठाया।

BLO भुगतान और प्रशासनिक खामियां

बैठक में SIR से जुड़े प्रशासनिक मुद्दों पर भी चर्चा हुई। आयोग ने बताया कि BLO को दिए जाने वाले 18,000 रुपये के मानदेय में से अब तक सिर्फ 7,000 रुपये ही जारी किए गए हैं, जिससे जमीनी स्तर पर काम प्रभावित हो रहा है। इसके अलावा, ERO और सहायक ERO के पदों पर अपेक्षित स्तर के अधिकारियों की कमी की बात भी सामने आई।

काले कपड़ों में विरोध प्रदर्शन

इससे पहले ममता बनर्जी, तृणमूल महासचिव अभिषेक बनर्जी और सांसद कल्याण बनर्जी ने SIR से प्रभावित बताए गए 12 परिवारों के सदस्यों के साथ चुनाव आयोग से मुलाकात की। इस दौरान तृणमूल प्रतिनिधिमंडल ने काले कपड़े पहनकर विरोध दर्ज कराया।

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