मोहन भागवत ने कहा, ‘आरएसएस सत्ता की भूखी नहीं, हिंदू समाज संगठन और चरित्र निर्माण के लिए समर्पित’
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने शुक्रवार को कहा कि संघ सत्ता की कोई लालसा नहीं रखता। इसका एकमात्र उद्देश्य सम्पूर्ण हिंदू समाज का संगठन और व्यक्तियों का चरित्र निर्माण है।
माधव कुंज, शताब्दी नगर, मेरठ में लगभग 950 राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों से संवाद करते हुए भागवत ने सामाजिक एकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि संघ किसी भी समूह के विरुद्ध या प्रतिस्पर्धा में काम नहीं करता। संघ की स्थापना के लगभग 100 वर्षों के सफर का जिक्र करते हुए उन्होंने युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
भागवत ने कहा कि “हिंदू” शब्द जाति नहीं, बल्कि विविधता में एकता का प्रतीक है। पूजा-पद्धति और देवी-देवता अलग हो सकते हैं, लेकिन सांस्कृतिक आधार सामंजस्य और एकता का है। सामाजिक एकता कमजोर होने पर राष्ट्र संकटों का शिकार होता है। उन्होंने समाज के चार आधार बताए- मूल्य संवर्धन, सनातन संस्कृति, धर्म की भावना और सत्य का अवतरण। संघ का मिशन व्यक्तिगत विकास के माध्यम से सम्पूर्ण हिंदू समाज का संगठन है।
स्वयंसेवक सामाजिक जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय हैं और राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानते हैं। खिलाड़ियों से कहा कि राष्ट्र निर्माण समाज का दायित्व है, किसी एक संगठन का नहीं। खेल लोगों को जोड़ने का शक्तिशाली माध्यम है। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में मेरठ की भूमिका का स्मरण कराया और बताया कि इसी ने केशव बलिराम हेडगेवार को 1925 में आरएसएस की स्थापना के लिए प्रेरित किया।
संघ से जुड़ने के लिए पांच सिद्धांत बताए- संगठन को अंदर से समझना, संलग्न संगठनों से जुड़ना, कार्यक्रमों का समर्थन, संवाद बनाए रखना और राष्ट्र के लिए निष्काम कार्य। खिलाड़ियों के सवालों का भी उत्तर दिया।
भागवत उत्तर प्रदेश भ्रमण पर हैं। आरएसएस शताब्दी वर्ष के तहत लखनऊ में 17-18 फरवरी को कार्यक्रम में शामिल हुए थे। उन्होंने बुधवार शाम योगी आदित्यनाथ से भेंट की।
