कुपोषण उन्मूलन के लिए सीएसआर और सहकारिता की साझेदारी पर राष्ट्रीय मंथन
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: देश में बच्चों के पोषण और कुपोषण उन्मूलन को लेकर कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) की भूमिका को मजबूत करने के उद्देश्य से एनडीडीबी फाउंडेशन फॉर न्यूट्रिशन द्वारा एक राष्ट्रीय सीएसआर कॉन्क्लेव का आयोजन 6 जनवरी को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में किया जा रहा है। कॉन्क्लेव का उद्घाटन केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह करेंगे।
“पोषण सुरक्षा एवं कुपोषण उन्मूलन में कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व की भूमिका” विषय पर आयोजित यह कॉन्क्लेव प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन को ज़मीनी स्तर पर आगे बढ़ाने की दिशा में एक अहम प्रयास माना जा रहा है।
कार्यक्रम में मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह), महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी, सहकारिता राज्य मंत्री श्री कृष्ण पाल गुर्जर, श्री मुरलीधर मोहोल, प्रो. एस.पी. सिंह बघेल, श्री जॉर्ज कुरियन सहित केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी और नीति-निर्माता शामिल होंगे। एनडीडीबी के अध्यक्ष डॉ. मीनेश शाह समेत विभिन्न मंत्रालयों के सचिव भी कार्यक्रम में उपस्थित रहेंगे।
कॉन्क्लेव के दौरान सीएसआर आधारित पोषण कार्यक्रमों का शुभारंभ भी किया जाएगा। श्री अमित शाह सेल–भिलाई इस्पात संयंत्र की गिफ्टमिल्क योजना के तीसरे चरण का उद्घाटन करेंगे, जिसके तहत छत्तीसगढ़ के खनन क्षेत्रों में स्थित सरकारी स्कूलों के लगभग 4,000 बच्चों को विटामिन A और D से फोर्टिफाइड दूध उपलब्ध कराया जाएगा। इस पहल का संचालन छत्तीसगढ़ दुग्ध महासंघ के माध्यम से किया जाएगा।
इसके अलावा, आईडीबीआई बैंक की सीएसआर पहल के अंतर्गत शिशु संजीवनी कार्यक्रम की शुरुआत भी की जाएगी। यह कार्यक्रम महाराष्ट्र के नागपुर जिले के ग्रामीण आंगनवाड़ी केंद्रों में पढ़ने वाले करीब 3,000 बच्चों को पोषण सहायता प्रदान करेगा। शिशु संजीवनी एक ऊर्जा-सघन, रेडी-टू-ईट फोर्टिफाइड पोषण उत्पाद है, जिसे भंडारा मिल्क यूनियन द्वारा तैयार किया जाएगा।
यह राष्ट्रीय कॉन्क्लेव सरकारी मंत्रालयों, सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कंपनियों, डेयरी सहकारी संस्थाओं, अनुसंधान संस्थानों और जमीनी स्तर पर कार्यरत लाभार्थी संगठनों को एक साझा मंच पर लाएगा। इसका उद्देश्य बच्चों में कुपोषण से निपटने के लिए सहयोगात्मक, नवाचार आधारित और दीर्घकालिक समाधान तलाशना है।
उद्घाटन सत्र के बाद दो तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें सार्वजनिक हस्तक्षेपों के माध्यम से पोषण एवं स्वास्थ्य सुधार और पोषण सुरक्षा के लिए कॉर्पोरेट–सहकारिता सहभागिता जैसे विषयों पर विचार-विमर्श होगा। देशभर से लगभग 1,200 प्रतिनिधियों के इस कॉन्क्लेव में भाग लेने की संभावना है।
