निशिकांत दुबे की नेहरू-गांधी परिवार पर टिप्पणियों से लोकसभा में हंगामा, प्रियंका गांधी ने दिया जवाब
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: बुधवार को संसद के भीतर किताबों को लेकर जबरदस्त राजनीतिक टकराव देखने को मिला। विवादित—प्रकाशित और अप्रकाशित—किताबों के हवाले ने लोकसभा की कार्यवाही को बार-बार बाधित किया। विपक्ष ने नरेंद्र मोदी सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया, जब भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने नेहरू-गांधी परिवार को निशाना बनाती किताबों से अंश पढ़े, जबकि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने से रोका गया।
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने संसद की कार्यप्रणाली को सत्तारूढ़ सरकार के पक्ष में झुकी हुई बताते हुए निशिकांत दुबे पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि दुबे ने जिन पुस्तकों का हवाला दिया, उनमें भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और सोनिया गांधी पर “अय्याशी, मक्कारी और भ्रष्टाचार” जैसे आरोप लगाए गए।
संसद परिसर के बाहर मीडिया से बात करते हुए प्रियंका गांधी ने कहा, “मोदी सरकार यह दिखाना चाहती है कि संसद सिर्फ वही चलाती है। यह स्पीकर के पद, संसद, लोकतंत्र और देश की जनता का अपमान है।”
दोपहर 2 बजे सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होते ही निशिकांत दुबे खड़े हुए और कहा कि जब राहुल गांधी ने एक अप्रकाशित किताब से उद्धरण पढ़ा, तो अब उनका भी नेहरू-गांधी परिवार को ‘बेनकाब’ करने का अधिकार है। इसके बाद उन्होंने एक के बाद एक कई किताबें सदन में दिखाईं और उनसे अंश पढ़ने लगे।
इस दौरान लोकसभा अध्यक्ष ने हस्तक्षेप करते हुए नियम 349 का हवाला दिया, जिसके तहत संसद की कार्यवाही से जुड़े बिना किसी पुस्तक, अख़बार या पत्र से पढ़ने की अनुमति नहीं है। अध्यक्ष ने कहा कि इसी नियम के तहत पहले ही निर्णय दिया जा चुका है, जब राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा का हवाला देने की कोशिश की थी।
जैसे ही विपक्षी सांसदों ने दुबे के भाषण का विरोध शुरू किया और वे रुकने को तैयार नहीं दिखे, लोकसभा अध्यक्ष ने सदन को शाम 5 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।
नेहरू-गांधी परिवार का नाम बार-बार सदन में लिए जाने से नाराज़ प्रियंका गांधी ने कहा, “जब भी मोदी सरकार को सदन में हंगामा करना होता है, वह निशिकांत दुबे को बोलने के लिए खड़ा कर देती है।”
उन्होंने आरोप लगाया, “एक तरफ नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को पहले से प्रकाशित किताब से उद्धरण पढ़ने नहीं दिया जाता, और दूसरी तरफ निशिकांत दुबे छह किताबें लेकर बैठते हैं, खुलेआम उन्हें दिखाते हैं, उनसे पढ़ते हैं, फिर भी उनका माइक बंद नहीं किया जाता।”
प्रियंका गांधी ने दावा किया कि जनरल नरवणे की किताब का हवाला देने से रोककर सरकार पूरे विपक्ष और “उन करोड़ों लोगों की आवाज़ दबाना चाहती है, जिन्होंने विपक्षी सांसदों को चुना है।”
उन्होंने कहा, “एक तरफ नेता प्रतिपक्ष को बोलने से रोका जाता है, दूसरी तरफ कोई भी खड़ा होकर असंगत बातें करता है। सदन में बार-बार नेहरू का नाम लिया जाता है।”
सरकार पर ध्यान भटकाने का आरोप लगाते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि मोदी सरकार नहीं चाहती कि लोग जानें कि जनरल नरवणे ने अपनी किताब में क्या लिखा है।
“जब हमारी सीमाओं पर चीनी सेना मौजूद थी, तब सत्ता में बैठे लोग यह तय नहीं कर पा रहे थे कि क्या किया जाए,” उन्होंने कहा।
इस बीच, राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कई किताबें दिखाईं, जिनके बारे में उनका दावा था कि वे नेहरू-गांधी परिवार के दशकों के “धोखे, विश्वासघात और भ्रष्टाचार” को उजागर करती हैं।
दुबे के बयानबाज़ी के चलते लोकसभा की कार्यवाही एक बार फिर बाधित हुई, जिसके कारण राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जवाब भी टल गया। शाम 5 बजे सदन दोबारा बैठा, लेकिन कुछ ही देर बाद पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया गया।
