नोएडा सेक्टर-150 हादसा: युवक की मौत के बाद CEO हटाए गए, SIT जांच के आदेश

Noida Sector-150 accident: CEO removed after youth's death, SIT inquiry orderedचिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: नोएडा के सेक्टर-150 में पानी से भरे गड्ढे में गिरने से 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत के बाद प्रशासनिक स्तर पर बड़ी कार्रवाई की गई है। नोएडा अथॉरिटी के CEO लोकेश एम. को उनके पद से हटाकर वेटिंग लिस्ट में डाल दिया गया है। इस मामले का संज्ञान लेते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्य सरकार ने तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, जो युवराज मेहता की मौत के कारणों की विस्तृत जांच करेगा। यह SIT मेरठ ज़ोन के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG) की निगरानी में काम करेगी। जांच दल में मेरठ के मंडलायुक्त और लोक निर्माण विभाग (PWD) के मुख्य अभियंता को शामिल किया गया है। SIT को पांच दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

इस बीच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि युवराज मेहता की मौत दम घुटने के कारण हुई, जिसमें कार्डियक अरेस्ट भी एक अहम वजह रहा। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि अत्यधिक तनाव और प्रतिकूल परिस्थितियों के चलते अंततः दिल का दौरा पड़ने से उनकी जान गई।

प्रारंभिक जांच के अनुसार, यह हादसा शनिवार देर रात कड़ाके की ठंड के दौरान हुआ। युवराज मेहता की कार सेक्टर-150 में एक पानी से भरे गड्ढे में जा गिरी, जहां पानी बेहद ठंडा था। बताया गया है कि वह काफी समय तक कार के अंदर फंसे रहे। बाद में वह किसी तरह आधी डूबी हुई कार की छत पर चढ़ गए और लगभग दो घंटे तक मदद का इंतजार करते रहे।

सूत्रों के मुताबिक, ठंडे तापमान, बर्फ जैसे पानी, लंबे समय तक फंसे रहने, मानसिक तनाव और घबराहट के कारण उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई। पुलिस को संदेह है कि बचाव अभियान में हुई देरी, हाइपोथर्मिया और अत्यधिक चिंता ने मिलकर कार्डियक अरेस्ट की स्थिति पैदा कर दी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दम घुटने और दिल का दौरा—दोनों को मौत के कारणों में शामिल किया गया है।

इस घटना के बाद इलाके में भारी आक्रोश देखने को मिला। रविवार को सुबह से देर शाम तक बड़ी संख्या में स्थानीय लोग दुर्घटनास्थल पर जमा रहे और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। लोगों ने आरोप लगाया कि युवराज की मदद की लगातार गुहार के बावजूद समय पर और प्रभावी बचाव अभियान नहीं चलाया गया।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई विभागों के अधिकारी मौके पर पहुंचे जरूर, लेकिन उनकी प्रतिक्रिया केवल औपचारिकता तक सीमित रही। लोगों ने इसे आपातकालीन प्रतिक्रिया में घोर लापरवाही बताया।

यह हादसा नोएडा अथॉरिटी की कथित लापरवाही को भी कठघरे में खड़ा करता है। सेक्टर-150 के निवासियों का आरोप है कि उन्होंने घटना से पहले ही इलाके में मौजूद सुरक्षा खतरों को लेकर अथॉरिटी को कई बार चेताया था। स्थानीय लोगों के अनुसार, स्पीड ब्रेकर और रिफ्लेक्टर लगाने, खुले नालों को ढकने, जलभराव वाले प्लॉट से पानी निकालने, स्ट्रीट लाइट सुधारने और साफ-सफाई को लेकर कई लिखित शिकायतें दी गई थीं।

इन शिकायतों को IGRS पोर्टल पर भी दर्ज कराया गया और संबंधित विभागों को पत्र भेजे गए। हालांकि, आरोप है कि वर्क सर्किल-10 ने जिम्मेदारी नोएडा अथॉरिटी के ट्रैफिक सेल पर डाल दी, जिससे कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी। दादरी के विधायक तेजपाल नागर और गौतम बुद्ध नगर के सांसद महेश शर्मा द्वारा सुरक्षा उपायों को लेकर लिखे गए पत्रों पर भी कथित तौर पर कोई जवाब नहीं दिया गया।

इस दर्दनाक घटना ने न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर किया है, बल्कि शहरी बुनियादी ढांचे और आपातकालीन व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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