पाकिस्तान का दोगलापन फिर सामने आया, UN की रिपोर्ट में लाल किले पर हुए आतंकी हमले के लिए जैश जिम्मेदार

चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र की एक ताज़ा प्रतिबंध निगरानी (सैंक्शन मॉनिटरिंग) रिपोर्ट में पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) को कई हमलों से जोड़ा गया है। इनमें पिछले वर्ष नई दिल्ली के लाल किले के पास हुई एक घातक घटना का भी उल्लेख है। इस खुलासे ने संगठन की वास्तविक परिचालन स्थिति (ऑपरेशनल स्टेटस) को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं, खासकर तब जब कुछ पक्षों द्वारा यह दावा किया जाता रहा है कि इस समूह को निष्क्रिय या समाप्त कर दिया गया है।
ये निष्कर्ष संयुक्त राष्ट्र की एनालिटिकल सपोर्ट एंड सैंक्शन मॉनिटरिंग टीम की 37वीं रिपोर्ट का हिस्सा हैं, जिसे सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2734 (2024) के तहत 1267 सैंक्शन कमेटी को प्रस्तुत किया गया। यह समिति आईएसआईएल (दाएश), अल-कायदा और उनसे जुड़े संगठनों के खिलाफ लगाए गए प्रतिबंधों की निगरानी करती है।
रिपोर्ट के अनुसार, एक सदस्य देश ने मॉनिटरिंग टीम को जानकारी दी कि जैश-ए-मोहम्मद ने कई हमलों की जिम्मेदारी ली है। इनमें 10 नवंबर को नई दिल्ली में लाल किले के निकट हुआ कथित हमला भी शामिल है, जिसमें 15 लोगों की मौत बताई गई थी। पैनल का मानना है कि ऐसे दावे इस ओर संकेत करते हैं कि JeM अब भी आतंकी गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
रिपोर्ट में संगठन के भीतर संरचनात्मक और संगठनात्मक बदलावों का भी उल्लेख किया गया है। जैश प्रमुख मसूद अज़हर, जिसे संयुक्त राष्ट्र ने वैश्विक आतंकवादी घोषित किया है, ने 8 अक्टूबर को महिलाओं के लिए एक अलग विंग गठित करने की घोषणा की थी। ‘जमात-उल-मुमिनात’ नामक यह इकाई संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंध सूची में शामिल नहीं है, हालांकि रिपोर्ट में इसे आतंकी गतिविधियों के समर्थन से जुड़ा बताया गया है।
मॉनिटरिंग टीम ने सदस्य देशों के भिन्न-भिन्न आकलनों को भी दर्ज किया है। जहां एक देश ने JeM की सक्रिय भूमिका और हमलों की जिम्मेदारी के उसके दावों पर चिंता जताई, वहीं दूसरे देश ने इस संगठन को ‘समाप्त’ बताया। हालांकि रिपोर्ट में संबंधित देशों के नाम उजागर नहीं किए गए हैं।
पाकिस्तान लगातार यह कहता रहा है कि जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) जैसे प्रतिबंधित संगठन उसके घरेलू आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत प्रतिबंधित हैं और अब सक्रिय नहीं हैं।
रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर की स्थिति का भी उल्लेख है। इसमें कहा गया है कि पहलगाम हमले में कथित रूप से शामिल तीन व्यक्तियों को 28 जुलाई 2025 को मार गिराया गया। अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए हमले में, जिसे लश्कर-ए-तैयबा के प्रॉक्सी संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) ने अंजाम दिया था, 26 नागरिकों की जान गई थी, जिसके बाद क्षेत्र में तनाव तेज़ हो गया था।
इसके जवाब में भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया और मई में पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ढांचे को निशाना बनाया, जिसके परिणामस्वरूप चार दिनों तक सीमित सैन्य टकराव की स्थिति बनी रही।
लाल किले के पास हुए कार विस्फोट की जांच जम्मू-कश्मीर पुलिस ने लगभग तीन सप्ताह तक की। अधिकारियों के अनुसार, यह हमला दो प्रतिबंधित संगठनों—जैश-ए-मोहम्मद और अंसार ग़ज़वत-उल-हिंद (AGuH)—से जुड़े तथाकथित ‘व्हाइट-कॉलर टेरर मॉड्यूल’ से संबंधित था।
बाद में इस मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंप दी गई। अब तक नौ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें तीन डॉक्टर भी शामिल हैं, जिन पर आतंकी नेटवर्क को सहायता पहुंचाने का संदेह है।
जांच के शुरुआती चरण में, पुलिस को विस्फोट में मारे गए संदिग्ध हमलावर उमर-उन-नबी के मोबाइल फोन से एक मिनट 20 सेकंड का वीडियो क्लिप मिला। इस वीडियो में वह कथित रूप से आत्मघाती हमले की योजना का उल्लेख करता दिख रहा है। इस फुटेज ने जांच एजेंसियों के उस संदेह को मजबूत किया कि यह किसी अकेले व्यक्ति की कार्रवाई नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और संगठित आतंकी साजिश थी।
