बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी पर पीएम मोदी ने दी श्रद्धांजलि, ‘महाराष्ट्र के विकास का उनका विज़न आज भी प्रेरणास्रोत’

PM Modi paid tribute to Balasaheb Thackeray on his birth centenary, saying, "His vision for the development of Maharashtra remains an inspiration even today."चिरौरी न्यूज

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र के सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य को गहराई से प्रभावित करने वाले बालासाहेब ठाकरे के विचार आज भी पीढ़ियों को प्रेरित करते हैं और उनके आदर्शों को साकार करने के प्रयास हमेशा जारी रहेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने लिखा, “स्वर्गीय श्री बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी पर, हम उस महान व्यक्तित्व को नमन करते हैं जिन्होंने महाराष्ट्र की सामाजिक और राजनीतिक दिशा को गहराई से प्रभावित किया।”

पीएम मोदी ने बालासाहेब ठाकरे की तीक्ष्ण बुद्धि, प्रभावशाली वक्तृत्व कला और अडिग वैचारिक प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए कहा कि जनता के साथ उनका एक विशेष जुड़ाव था। उन्होंने कहा, “राजनीति के अलावा उन्हें संस्कृति, साहित्य और पत्रकारिता में भी गहरी रुचि थी। एक कार्टूनिस्ट के रूप में उनका करियर समाज को बारीकी से देखने और निडर टिप्पणी करने की उनकी क्षमता को दर्शाता है।”

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “महाराष्ट्र के विकास को लेकर उनका विज़न आज भी हमें प्रेरित करता है और हम उसे साकार करने के लिए सदैव प्रयासरत रहेंगे।”

गौरतलब है कि बालासाहेब ठाकरे का जन्म 23 जनवरी 1926 को पुणे में हुआ था और उनका निधन 17 नवंबर 2012 को मुंबई में हुआ। वे एक प्रख्यात पत्रकार, कार्टूनिस्ट और राजनेता थे। उन्होंने शिवसेना की स्थापना की, जो आगे चलकर महाराष्ट्र की राजनीति में एक प्रभावशाली शक्ति बनकर उभरी।

बालासाहेब ठाकरे अपनी प्रखर हिंदुत्व विचारधारा के लिए जाने जाते थे और उन्होंने राज्य की राजनीतिक व सांस्कृतिक पहचान पर गहरी छाप छोड़ी। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1950 के दशक की शुरुआत में मुंबई की एक पत्रिका में कार्टूनिस्ट के रूप में की थी। उनके कार्टून जापान के ‘असाही शिंबुन’ और ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ के संडे एडिशन जैसे अंतरराष्ट्रीय प्रकाशनों में भी प्रकाशित हुए।

1960 के दशक में उन्होंने अपने भाई के साथ मराठी साप्ताहिक पत्रिका ‘मार्मिक’ की शुरुआत की, जिसके माध्यम से उन्होंने बाहरी लोगों, विशेषकर दक्षिण भारत और गुजरात से आए प्रवासियों के बढ़ते प्रभाव की आलोचना की। इसी विचारधारा से प्रेरित होकर 1966 में ‘मराठी मानुस’ और “महाराष्ट्र महाराष्ट्रियों के लिए” के नारे के साथ शिवसेना का गठन हुआ।

हालांकि बालासाहेब ठाकरे ने कभी कोई संवैधानिक पद नहीं संभाला और न ही चुनाव लड़ा, फिर भी उन्हें दशकों तक महाराष्ट्र की राजनीति का सबसे शक्तिशाली चेहरा माना गया। समर्थक उन्हें ‘हिंदू हृदयसम्राट’ कहते थे, जबकि राजनीतिक गलियारों में उन्हें ‘महाराष्ट्र का गॉडफादर’ भी कहा जाता था।

उनकी राजनीतिक ताकत का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि 1995 में शिवसेना-भाजपा गठबंधन की सरकार बनने के बाद बॉम्बे का नाम बदलकर मुंबई किया गया, जो देवी मुंबादेवी के नाम पर आधारित है।

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