प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शी जिनपिंग के साथ वार्ता के दौरान सीमा पार आतंकवाद पर की चर्चा
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने रविवार को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अपनी द्विपक्षीय वार्ता के दौरान सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा प्रमुखता से उठाया और इस चुनौती से निपटने में बीजिंग से समर्थन मांगा। शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के मौके पर तियानजिन में मीडिया को जानकारी देते हुए मिस्री ने कहा कि चीन की ओर से भारत को इस मुद्दे पर सहयोग का आश्वासन दिया गया है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग से बातचीत में आतंकवाद को एक प्राथमिक चिंता के रूप में रखा और स्पष्ट रूप से बताया कि यह एक ऐसा संकट है जिससे भारत और चीन दोनों प्रभावित हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को एक-दूसरे के प्रति समझ और सहयोग का विस्तार करना चाहिए ताकि इस संकट का मिलकर मुकाबला किया जा सके। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट रूप से चीन से इस संबंध में सहयोग की मांग की, जिस पर चीन की ओर से समर्थन भी प्राप्त हुआ।
मिस्री ने बताया कि प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे पर अपनी बात संक्षेप में, परंतु बेहद स्पष्ट रूप में रखी। उन्होंने कहा कि आतंकवाद एक ऐसा संकट है जिसका शिकार भारत और चीन दोनों रहे हैं, और इसी वजह से उन्होंने चीन से सहयोग की मांग की थी, जिसे स्वीकार कर लिया गया।
प्रेस वार्ता के दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ्स पर भी दोनों नेताओं के बीच चर्चा हुई, तो विदेश सचिव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग ने वैश्विक आर्थिक परिदृश्य और उससे उत्पन्न चुनौतियों पर विचार किया। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बातचीत का मुख्य फोकस द्विपक्षीय संबंधों पर ही रहा। दोनों नेताओं ने चर्चा की कि इन वैश्विक परिस्थितियों का उपयोग आपसी समझ को बढ़ाने और द्विपक्षीय आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए कैसे किया जा सकता है।
मिस्री ने यह भी जानकारी दी कि भारत और चीन के बीच सीधी उड़ानें जल्द ही फिर से शुरू होने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों के बीच पिछले कुछ महीनों से इस विषय पर गहन बातचीत चल रही है और इस वर्ष की शुरुआत में उच्च स्तर पर हुई सहमति के बाद इस दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। हाल ही में भारतीय नागरिक उड्डयन प्रतिनिधिमंडल की बीजिंग यात्रा के बाद इस प्रक्रिया को और गति मिली है और अब उड़ानों के पुनः आरंभ के लिए एक व्यापक सहमति बन चुकी है।
उन्होंने कहा कि अब केवल कुछ संचालनात्मक मुद्दे जैसे कि एयर सर्विसेज एग्रीमेंट, शेड्यूलिंग और कैलेंडर संबंधी बिंदु शेष हैं, जिन्हें आने वाले हफ्तों में सुलझा लिया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी ने भी आज सुबह अपने वक्तव्य में उड़ानों के पुनः आरंभ का उल्लेख किया।
भारत और चीन के बीच व्यापार घाटे के बारे में पूछे जाने पर विदेश सचिव ने स्वीकार किया कि यह एक बड़ा और लगातार बना हुआ मुद्दा है, जो कई वर्षों से चर्चा में है। उन्होंने बताया कि हाल ही में चीनी विदेश मंत्री वांग यी की दिल्ली यात्रा के दौरान भी इस विषय पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर से बातचीत हुई थी।
मिस्री ने कहा कि व्यापार और व्यापार घाटे के मुद्दे को दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक दृष्टिकोण और संवाद के संदर्भ में देखना जरूरी है। दोनों देशों के बीच व्यापार में वृद्धि और घाटे में कमी आपसी संबंधों की धारणा को सकारात्मक दिशा में बदल सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि इस विषय पर बातचीत कई स्तरों पर हो रही है — सरकारों के बीच, व्यापारिक समुदायों के बीच और उन संस्थाओं के बीच जो व्यापार से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हैं। इसका परिणाम इस प्रक्रिया के आगे किस दिशा में बढ़ने पर निर्भर करेगा।
