प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अरुणाचल प्रदेश में ₹5,127 करोड़ से अधिक की 13 विकास परियोजनाओं की रखी आधारशिला
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर स्थित इंदिरा गांधी पार्क से वर्चुअल माध्यम से ₹5,127 करोड़ से अधिक की 13 बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की आधारशिला रखी। इस अवसर पर उन्होंने कर्तव्यपथ से जुड़कर राज्य के लिए विकास की नई राह को मजबूती दी। कार्यक्रम की शुरुआत प्रधानमंत्री द्वारा एक प्रदर्शनी का अवलोकन करने से हुई, जहाँ उन्होंने स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प और व्यापारियों से बातचीत की।
इन परियोजनाओं में दो प्रमुख जल विद्युत परियोजनाएँ—टाटो-I (186 मेगावाट) और हीओ (240 मेगावाट)—शामिल हैं, जिन्हें नॉर्थ ईस्टर्न इलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (नीपको) द्वारा अरुणाचल प्रदेश सरकार के साथ संयुक्त उद्यम में विकसित किया जा रहा है। शि योमी जिले की यारजेप नदी पर स्थित इन परियोजनाओं की कुल वार्षिक उत्पादन क्षमता 1803 मिलियन यूनिट होगी। राज्य सरकार के अनुसार, इन संयंत्रों के चालू होने के बाद अरुणाचल प्रदेश को हर वर्ष 98 करोड़ रुपये से अधिक की मुफ्त बिजली और 16 करोड़ रुपये से अधिक का स्थानीय क्षेत्र विकास कोष मिलेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने तवांग में प्रस्तावित एकीकृत कन्वेंशन सेंटर की भी आधारशिला रखी, जिसकी लागत ₹147 करोड़ रुपये आंकी गई है। यह कन्वेंशन सेंटर न केवल सम्मेलनों और प्रदर्शनियों के लिए उपयोगी होगा, बल्कि पर्यटन, सेवाओं और हस्तशिल्प के क्षेत्र में भी स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करेगा।
इसके अलावा प्रधानमंत्री ने ₹1,291 करोड़ की लागत से बनने वाली 10 अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का भी शिलान्यास किया। इनमें 1,830 किलोमीटर लंबी फ्रंटियर हाईवे परियोजना और वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम (वीवीपी) का दूसरा चरण प्रमुख हैं। प्रस्तावित हाईवे परियोजना मैकमोहन रेखा के समानांतर बोमडिला (पश्चिम कामेंग) से विजयनगर (चांगलांग) तक फैलेगी, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करेगी।
वीवीपी चरण-2 के तहत 122 सीमावर्ती गाँवों को बारहमासी सड़कों, 4G टेलीकॉम नेटवर्क और ऑन-ग्रिड विद्युतीकरण से जोड़ा जाएगा। इनमें से 67 गाँव भारत-म्यांमार और 55 गाँव भारत-भूटान सीमा पर स्थित हैं। गृह मंत्रालय ने इसके लिए ₹2,205 करोड़ की राशि मंजूर की है। यह कार्यक्रम वर्ष 2028-29 तक अरुणाचल प्रदेश समेत देश के 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में लागू किया जाएगा।
कार्यक्रम का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में समृद्धि और सुरक्षा को सुनिश्चित करना, सीमा पार अपराध को नियंत्रित करना और सीमावर्ती नागरिकों को राष्ट्र के साथ अधिक गहराई से जोड़ना है, ताकि वे “सीमा सुरक्षा बलों की आँख और कान” के रूप में कार्य कर सकें।
इस अवसर पर अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) के.टी. परनाइक, मुख्यमंत्री पेमा खांडू, उपमुख्यमंत्री चौना मीन, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू, विधानसभा अध्यक्ष तेसम पोंगटे, लोकसभा सदस्य तापिर गाओ और राज्यसभा सदस्य नबाम रेबिया सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित थे।
