बिहार में मतदाता सूची की विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया पर गरमाई सियासत, RJD पहुंची सुप्रीम कोर्ट
चिरौरी न्यूज
पटना: बिहार में विधानसभा चुनावों से ठीक पहले चुनाव आयोग (ECI) द्वारा शुरू की गई Special Intensive Revision (SIR) यानी विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने चुनाव आयोग की इस पहल को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
RJD की ओर से सांसद मनोज झा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को तत्काल लागू करने के चुनाव आयोग के निर्देश का विरोध किया है। उनका तर्क है कि यह निर्णय चुनावों से पहले मतदाता सूची में अनावश्यक छेड़छाड़ का रास्ता खोलता है।
चुनाव आयोग ने रविवार को जानकारी दी कि SIR की प्रारंभिक चरण समाप्त हो चुका है और फॉर्मों का वितरण एवं प्रिंटिंग लगभग पूरी हो चुकी है। आयोग के मुताबिक, रविवार शाम 6 बजे तक 1,69,49,208 फॉर्म जमा किए जा चुके हैं, जो बिहार के 7.90 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं का 21.46% है। इनमें से 7.25% फॉर्म ECINET पर अपलोड किए जा चुके हैं।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि 24 जून 2025 को जारी निर्देशों में कोई बदलाव नहीं किया गया है और सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहें निराधार हैं।
“कोई भी पार्टी वर्तमान मतदाता सूची से संतुष्ट नहीं”: मुख्य चुनाव आयुक्त
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि पिछले चार महीनों में बिहार के सभी 4,123 EROs, 775 DEOs और 36 CEOs ने लगभग 28,000 राजनीतिक प्रतिनिधियों के साथ 5,000 बैठकें की हैं। उन्होंने कहा, “कोई भी पार्टी मतदाता सूची की वर्तमान स्थिति से संतुष्ट नहीं थी, चाहे वह किसी भी कारण से हो।”
उन्होंने यह भी बताया कि 77,895 बूथ लेवल ऑफिसर (BLOs) घर-घर जाकर मतदाताओं को फॉर्म भरने में मदद कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त 20,603 BLOs और लगभग चार लाख स्वयंसेवक, जिनमें सरकारी कर्मचारी, एनसीसी कैडेट्स और एनएसएस सदस्य शामिल हैं, बुजुर्गों, दिव्यांगों और असहाय मतदाताओं की मदद कर रहे हैं।
TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने चुनाव आयोग पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि SIR का उद्देश्य बिहार में युवा योग्य मतदाताओं को मतदाता सूची से बाहर करना है। उन्होंने कहा, “यह एक सुनियोजित योजना है, जिससे लाखों वैध मतदाताओं को वंचित किया जाएगा। बाद में इसी मॉडल को बंगाल में लागू किया जाएगा, जहां 2026 में चुनाव होने हैं।”
महुआ मोइत्रा ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर आयोग के फैसले को संविधान और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 का उल्लंघन बताया है। उन्होंने X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, “EC अब BJP का ज़मीनी हथियार बन गया है और अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी को भूल चुका है।”
उनका आरोप है कि 1 जुलाई 1987 से 2 दिसंबर 2004 के बीच जन्मे मतदाताओं को सूची से हटाकर भाजपा को लाभ पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (PUCL), एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स, और योगेंद्र यादव जैसे सामाजिक कार्यकर्ता भी इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं। ECI ने अपने पक्ष में कहा है कि SIR की प्रक्रिया शहरीकरण, प्रवासन, नए युवा मतदाता, अप्रतिबंधित मृत्यु के मामले और विदेशी अवैध प्रवासियों के नाम जैसे कारणों से आवश्यक हो गई थी। आयोग ने यह भी आश्वासन दिया कि मतदाता सूची में संशोधन संविधान और कानून के अनुसार ही किया जा रहा है।
