‘कोल्ड वार’ के बाद राहुल गांधी और शशि थरूर आमने सामने, कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में लिया हिस्सा
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: राहुल गांधी और शशी थरूर सहित कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शनिवार को पार्टी की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक में शामिल हुए। पिछले कुछ दिनों से दोनों के बीच रिश्तों में खटास देखने को मिली थी, क्योंकि थरूर ने कई मौकों पर बीजेपी सरकार की नीतियों का समर्थन किया, खासकर ऑपरेशन सिंदूर के समय थरूर ने विदेशों में भारत सरकार के लिए एक अहम भूमिका निभाया था। जबकि कांग्रेस पार्टी सरकार की योजनाओं का विरोध करती रही है।
इसके बावजूद, पार्टी के चुनावी रणनीति और प्रमुख मुद्दों पर चर्चा के लिए दोनों नेताओं की मौजूदगी ने एकजुटता का संदेश दिया और संकेत दिया कि मतभेदों के बावजूद कांग्रेस नेतृत्व अब सामने से विपक्षी ताकतों के खिलाफ मोर्चा तैयार करने में जुटा है।
सूत्रों के अनुसार, CWC बैठक का मुख्य फोकस इस “जनविरोधी” कानून के खिलाफ जनसंपर्क अभियान चलाने और इसे जमीनी स्तर तक पहुँचाने पर रहेगा। MGNREGA का नाम बदलकर हाल ही में पारित G RAM G किया गया कानून कांग्रेस के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि इसे यूपीए सरकार की उपलब्धियों में कटौती के रूप में देखा जा रहा है।
बैठक में पार्टी एक व्यापक विरोध कार्यक्रम को अंतिम रूप देने की योजना बना रही है। हालांकि, पिछले अनुभवों से पता चला है कि कांग्रेस अक्सर मुद्दों पर लंबे समय तक अपनी सक्रियता बनाए रखने में नाकाम रही है, चाहे वह GST सुधार हो या राफेल सौदा।
MGNREGA, जो 2005 में लागू हुआ था, हर ग्रामीण परिवार को सालाना 100 दिन का अनस्किल्ड कार्य प्रदान करता था। नए G RAM G कानून में इसे 125 दिन तक बढ़ा दिया गया है। लेकिन इस योजना के फंडिंग मॉडल ने विवाद खड़ा कर दिया है। MGNREGA में पूरा वेतन केंद्र सरकार द्वारा दिया जाता था, जबकि नए कानून के तहत राज्यों को भी भुगतान का हिस्सा साझा करना होगा।
नेशनल हेराल्ड और अरावली पर भी होगी चर्चा
बैठक में नेशनल हेराल्ड मामले पर भी चर्चा होने की संभावना है, जिसमें सोनिया और राहुल गांधी पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। हाल ही में दिल्ली की एक अदालत ने ED की शिकायत पर विचार नहीं किया। एजेंसी अब दिल्ली हाईकोर्ट गई है, जिसने कांग्रेस नेताओं को नोटिस जारी किया है।
केंद्र द्वारा अरावली की नई परिभाषा को लेकर भी बैठक में विचार किया जाएगा। नई परिभाषा के अनुसार केवल 100 मीटर से अधिक ऊँचाई वाले पहाड़ों को ‘अरावली हिल्स’ माना जाएगा। इससे कम ऊँचाई वाले क्षेत्रों में खनन पर नियंत्रण नहीं रहेगा, जिससे पर्यावरणीय चिंताएं बढ़ गई हैं।
बैठक में हालिया बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमलों और कर्नाटक में कांग्रेस नेतृत्व को लेकर चल रहे संकट पर भी चर्चा की संभावना है। विशेष रूप से DK शिवकुमार के समर्थक विधायक दिल्ली में दबाव बनाने के बाद भी पार्टी ने अभी तक मुख्यमंत्री के पद की घोषणा नहीं की है।
