राजनाथ सिंह ने दिया संकेत, भारत की तीसरी न्यूक्लियर सबमरीन आईएनएस अरिधमन आज हो सकती है शामिल

चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को आईएनएस अरिधमन के कमीशनिंग को लेकर बड़ा संकेत दिया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक संक्षिप्त लेकिन रहस्यमयी पोस्ट में लिखा, “यह सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि शक्ति का प्रतीक है—‘अरिधमन’!” इसके तुरंत बाद सूत्रों ने पुष्टि की कि रक्षा मंत्री आज इस परमाणु-संचालित पनडुब्बी को औपचारिक रूप से नौसेना में शामिल करेंगे।
INS अरिधमन भारत की स्वदेशी परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों (SSBN) परियोजना का तीसरा अहम हिस्सा है। इससे पहले आईएनएस अरिहंत (2016) और आईएनएस अरिघाट (2024) को नौसेना में शामिल किया जा चुका है।
करीब 7,000 टन वजनी अरिधमन अपने पूर्ववर्तियों से अधिक उन्नत और स्टील्थ क्षमताओं से लैस है। इसमें भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र द्वारा विकसित 83 मेगावाट का प्रेसराइज्ड वाटर रिएक्टर लगाया गया है, जो इसे लंबे समय तक पानी के भीतर संचालित रहने में सक्षम बनाता है।
इस पनडुब्बी की सबसे बड़ी ताकत इसकी मारक क्षमता है। इसमें 8 वर्टिकल लॉन्च ट्यूब हैं, जिनसे यह 3,500 किमी रेंज वाली K-4 बैलिस्टिक मिसाइल या 750 किमी रेंज वाली K-15 मिसाइलें दाग सकती है। यह क्षमता भारत की समुद्र-आधारित परमाणु प्रतिरोधक शक्ति को और मजबूत बनाती है।
INS अरिधमन के शामिल होने से भारत की “कंटीन्यूअस एट-सी डिटरेंस” क्षमता को बल मिलेगा—यानी हर समय कम से कम एक परमाणु-सुसज्जित पनडुब्बी समुद्र में तैनात रह सकेगी। यह भारत की “सेकंड-स्ट्राइक क्षमता” को सुनिश्चित करता है, जिससे किसी भी संभावित दुश्मन के लिए पहला हमला करना बेहद जोखिम भरा हो जाता है।
राजनाथ सिंह का यह बयान उनके विशाखापत्तनम दौरे के दौरान आया, जहां वे आज उन्नत स्टील्थ फ्रिगेट INS Taragiri को भी कमीशन करने वाले हैं। विशाखापत्तनम भारत की परमाणु पनडुब्बियों का प्रमुख बेस और निर्माण केंद्र है।
गौरतलब है कि फिलहाल भारत के पास दो SSBN, आईएनएसअरिहंत और आईएनएस अरिघात, सक्रिय हैं, जबकि अरिधमन तीसरी पनडुब्बी के रूप में जुड़ने जा रही है। एक चौथी पनडुब्बी पर भी काम जारी है। विशेषज्ञों के अनुसार, चार SSBN के बेड़े के साथ भारतीय नौसेना पूर्ण “सेकंड-स्ट्राइक” क्षमता हासिल कर लेगी।
इससे पहले नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने भी संकेत दिया था कि यह पनडुब्बी अप्रैल-मई 2026 के बीच कमीशन की जाएगी, और दिसंबर 2025 तक यह अपने अंतिम परीक्षण चरण में पहुंच चुकी थी।
