राम चरण और उपासना ने जुड़वा बच्चों का नाम शिवराम और अनवीरा देवी रखा, मतलब भी बताया
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: कोनिडेला परिवार में खुशियां दोगुनी हो गई हैं। अभिनेता राम चरण और उपासना ने अपने नवजात जुड़वा बच्चों को पारंपरिक नामकरण संस्कार के बाद आधिकारिक रूप से सबके सामने प्रस्तुत किया। इस विशेष अवसर पर परिवार के करीबी सदस्य और मित्र उपस्थित रहे।
31 जनवरी को जुड़वा बच्चों के जन्म के बाद दंपति ने पूरे विधि-विधान और पारिवारिक परंपराओं के साथ नामकरण समारोह आयोजित किया। राम चरण और उपासना के लिए यह केवल एक धार्मिक रस्म नहीं, बल्कि गहराई से जुड़ा आध्यात्मिक और भावनात्मक निर्णय था। उन्होंने एक अंतरराष्ट्रीय मनोरंजन पत्रिका को दिए साक्षात्कार में बताया कि यह प्रक्रिया सोच-समझकर पूरी की गई और इसमें परिवार के बड़ों का मार्गदर्शन अत्यंत महत्वपूर्ण रहा।
राम चरण ने कहा, “हम दोनों के लिए बच्चों का नामकरण बेहद व्यक्तिगत और आध्यात्मिक निर्णय था। हमने इस विषय पर गंभीरता से विचार किया, लेकिन हमारे माता-पिता भी इस यात्रा का अहम हिस्सा रहे। हमारे संस्कारों में बड़ों का अनुभव और आशीर्वाद बहुत मायने रखता है, इसलिए उनकी उपस्थिति हमारे लिए विशेष रही।”
दंपति ने अपने पुत्र का नाम शिवराम रखा है। यह नाम आस्था और पारिवारिक विरासत का प्रतीक है। राम चरण ने बताया कि यह नाम भगवान शिव और भगवान राम से प्रेरित है—जहां शिव शक्ति और संयम के प्रतीक हैं, वहीं राम मर्यादा, करुणा और धर्म के प्रतीक माने जाते हैं। यह नाम उनके पिता के जन्म नाम ‘शिव शंकर वर प्रसाद’ से भी जुड़ता है, जिससे परिवार की परंपरा अगली पीढ़ी तक पहुंचती है।
वहीं, उनकी पुत्री का नाम अनवीरा देवी रखा गया है, जो साहस और दिव्य स्त्री शक्ति का प्रतीक माना गया है। राम चरण ने कहा, “‘वीरा’ बहादुरी का प्रतीक है और ‘अन’ उसे असीम अर्थ देता है। ‘देवी’ शब्द हमने सोच-समझकर चुना है, क्योंकि यह दर्शाता है कि शक्ति और करुणा साथ-साथ चल सकती हैं। हमारे लिए ये नाम केवल पहचान नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों और आशीर्वाद का प्रतीक हैं।”
दूसरी बार मातृत्व के अनुभव को साझा करते हुए उपासना ने कहा कि इस बार वह अधिक शांत और सजग महसूस कर रही हैं। उन्होंने कहा, “पहली बार मां बनना सुंदर लेकिन चुनौतीपूर्ण अनुभव होता है। इस बार मैं अधिक संतुलित और आत्मविश्वास से भरी महसूस कर रही हूं। मैंने छोटी-छोटी बातों पर चिंता करना छोड़ दिया है और हर पल को सहजता से जीना सीख लिया है।”
इस प्रकार कोनिडेला परिवार में नए जीवन के आगमन के साथ परंपरा, आस्था और पारिवारिक मूल्यों का सुंदर संगम देखने को मिला।
