रूस ने ट्रंप के दावे को नकारा, ‘भारत से रूसी तेल आयात रोकने का कोई संकेत नहीं’
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: क्रेमलिन ने मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत, वॉशिंगटन के साथ व्यापार समझौता होने के बाद रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा। रूस का कहना है कि उसे नई दिल्ली की ओर से अब तक ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है और वह भारत के साथ संबंधों को “हर संभव तरीके से” मजबूत करता रहेगा।
हालांकि भारत ने अमेरिकी टैरिफ में कटौती की पुष्टि की है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रंप से बातचीत के बाद इस कदम का स्वागत भी किया, लेकिन रूस से तेल आयात बंद करने को लेकर भारत की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
ट्रंप ने व्यापार समझौते की घोषणा की
डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को अमेरिका–भारत के बीच नए व्यापार समझौते की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस समझौते के तहत पारस्परिक (रेसिप्रोकल) टैरिफ घटाए गए हैं और बाजार तक पहुंच का विस्तार किया गया है। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि भारत रूसी तेल का आयात बंद करेगा और अमेरिका से सामान की खरीद में भारी बढ़ोतरी करेगा।
यूक्रेन युद्ध से जोड़ा तेल आयात का मुद्दा
ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी तेल खरीदना बंद करने और इसके बजाय अमेरिका तथा संभावित रूप से वेनेजुएला से तेल आयात बढ़ाने पर सहमति जताई है। उनके मुताबिक, रूस की ऊर्जा आय में कटौती से यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने में मदद मिलेगी। ट्रंप ने दावा किया कि इस संघर्ष में हर हफ्ते हजारों लोग मारे जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी को “शक्तिशाली और सम्मानित नेता” बताते हुए ट्रंप ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच व्यापार और वैश्विक सुरक्षा मुद्दों पर चर्चा हुई और तेल से जुड़ा फैसला शांति बहाली के व्यापक प्रयास का हिस्सा है। उन्होंने यह भी कहा कि यह फैसला “तुरंत प्रभाव से” लागू होगा और इसके साथ ही भारतीय उत्पादों पर अमेरिकी टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत कर दिए जाएंगे।
भारत ने टैरिफ पर दी प्रतिक्रिया, तेल पर नहीं
हालांकि, भारत की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी में रूसी तेल आयात रोकने का कोई जिक्र नहीं किया गया। सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्रंप के साथ “शानदार” बातचीत का उल्लेख किया और ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत करने के लिए धन्यवाद दिया।
प्रधानमंत्री ने भारत–अमेरिका द्विपक्षीय संबंधों में प्रगति, साथ ही क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर सहयोग की बात कही, लेकिन भारत की ऊर्जा नीति या तेल आयात स्रोतों में किसी बदलाव का संकेत नहीं दिया।
