सोमनाथ मंदिर भारतीय आत्मा का शाश्वत उद्घोष : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि सोमनाथ मंदिर भारतीय आत्मा का शाश्वत उद्घोष है। उन्होंने कहा कि नफरत और कट्टरता भले ही क्षणभर के लिए विनाश कर सकती हैं, लेकिन आस्था और सद्भाव में वह शक्ति है जो सृष्टि को अनंत काल तक जीवित रखती है।
सोमनाथ मंदिर के इतिहास पर एक विस्तृत ब्लॉग में प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 2026 विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले आक्रमण के एक हजार वर्ष पूरे होने का प्रतीक होगा। जनवरी 1026 में इस पवित्र स्थल पर आक्रमण हुआ था, लेकिन तमाम विपत्तियों और हमलों के बावजूद सोमनाथ आज भी गर्व के साथ खड़ा है।
प्रधानमंत्री ने लिखा, “सोमनाथ… यह शब्द ही हमारे मन और हृदय में गर्व की अनुभूति भर देता है। यह भारत की आत्मा का शाश्वत उद्घोष है।” उन्होंने बताया कि गुजरात के प्रभास पाटन में स्थित यह मंदिर द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रथम है और इसका धार्मिक व सभ्यतागत महत्व अत्यंत गहरा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सोमनाथ का इतिहास भारत की अटूट सभ्यतागत चेतना का जीवंत प्रमाण है। उन्होंने उल्लेख किया कि विदेशी आक्रांताओं का उद्देश्य भक्ति नहीं, बल्कि विनाश था, लेकिन भारत की आस्था और जन-शक्ति ने हर बार इस मंदिर को पुनर्जीवित किया।
उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2026 में एक और ऐतिहासिक पड़ाव पूरा होगा, जब सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होंगे। 11 मई 1951 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर को श्रद्धालुओं के लिए खोला गया था।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ पर हुए आक्रमणों का प्रभाव भारत के मनोबल पर गहरा था, लेकिन इसके बावजूद भारत की आत्मा कभी टूटी नहीं। उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल, के.एम. मुंशी और अहिल्याबाई होलकर के योगदान को याद करते हुए कहा कि इन महान व्यक्तित्वों के प्रयासों से सोमनाथ का गौरव पुनः स्थापित हुआ।
स्वामी विवेकानंद का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे मंदिर भारत के इतिहास और आत्मा को पुस्तकों से कहीं अधिक स्पष्ट रूप से प्रकट करते हैं। उन्होंने कहा कि सोमनाथ ने सैकड़ों आक्रमणों और पुनर्जन्मों को देखा है, जो भारत की जीवटता का प्रतीक है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज का भारत भी उसी भावना के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक विकास का केंद्र बन रहा है और दुनिया भारत को आशा और विश्वास की दृष्टि से देख रही है।
अपने संदेश के अंत में प्रधानमंत्री ने कहा, “सोमनाथ हमें सिखाता है कि विनाश करने वाले इतिहास में केवल एक संदर्भ बनकर रह जाते हैं, जबकि आस्था और सत्य पर आधारित मूल्य युगों तक जीवित रहते हैं।” उन्होंने कहा कि सोमनाथ की तरह ही भारत भी अपनी प्राचीन गरिमा को पुनः प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और ‘विकसित भारत’ के संकल्प के साथ विश्व कल्याण के लिए कार्य कर रहा है।
