“घर पर मातृभाषा बोलें”: भाषा विवाद के बीच RSS प्रमुख मोहन भागवत
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने बुधवार को पूरे देश में सामाजिक सद्भाव बनाए रखने और लोगों से भाषा, जाति और धन के भेदभाव से ऊपर उठने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि अपने घरों में मातृभाषा बोलना जरूरी है और सभी भाषाओं का समान सम्मान होना चाहिए।
भागवत की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब दक्षिण भारत की कई क्षेत्रीय पार्टियों ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार हिंदी को अन्य क्षेत्रीय भाषाओं पर प्राथमिकता दे रही है। साथ ही, देहरादून में कथित नस्लीय दुर्व्यवहार और त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा की हत्या के बाद देशभर में गुस्सा बढ़ा हुआ है।
भागवत ने छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले के सोनपैरी गाँव में आयोजित ‘हिंदू सम्मेलन’ में कहा, “कम से कम अपने घरों में हमें अपनी मातृभाषा में बात करनी चाहिए। अगर आप किसी दूसरे राज्य में रहते हैं, तो वहां की भाषा सीखना चाहिए। सभी भाषाएँ भारत की राष्ट्रीय भाषाएँ हैं और सभी का समान महत्व है। पूरा देश सबका है, और सामाजिक सद्भाव भारत की पहचान है।”
बीजेपी नेताओं ने भागवत की टिप्पणियों की सराहना की
कई बीजेपी नेताओं ने RSS प्रमुख के बयान की तारीफ़ करते हुए इसे भारतीय पहचान के समावेशी स्वरूप के रूप में देखा।
प्रवीण खंडेलवाल, बीजेपी सांसद ने कहा, “जो कोई भी भारत में रहता है और ‘वंदे मातरम’ कहता है, वह सही मायने में भारतीय है। मोहन भागवत ने सही कहा कि भारत एक शाश्वत राष्ट्र और हिंदू राष्ट्र है। जो कोई भी भारत को अपनी मां मानता है, वह भारतीय है, चाहे उसका धर्म कुछ भी हो।”
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा, “भागवत लगातार सामाजिक सद्भाव पर जोर देते हैं और लोगों को एक साथ लाते हैं। उनका यह दृष्टिकोण भारतीय संस्कृति के मूल्यों को दर्शाता है, जिसमें सभी को साथ लेकर चलना शामिल है।”
शिवसेना नेता शायना एनसी ने भी इस पर सहमति जताते हुए कहा, “भारत हमेशा से सामाजिक सद्भाव और एकता का प्रतीक रहा है। हर नागरिक जाति, धर्म, लिंग या भाषा से ऊपर उठकर साझा लक्ष्य की ओर बढ़ता है। जाति केवल समाज और राष्ट्र की सेवा के लिए मौजूद है।”
विपक्ष की प्रतिक्रिया
विपक्ष ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी और भागवत के बयान को बीजेपी की विचारधारा का समर्थन करार दिया। RJD सांसद मनोज झा ने कहा, “भागवत के इतने बड़े बयान के बाद, सबसे पहले यह तय होना चाहिए कि वे किसकी विचारधारा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। क्या बीजेपी उनके संदेश से प्रेरित है? और त्रिपुरा के छात्र की हत्या पर उनका कोई बयान नहीं आया। भाषाई और नस्लीय भेदभाव के खुले रूपों पर वह चुप क्यों हैं?”
कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने कहा, “भागवत बीजेपी नेताओं से कहें कि वे दक्षिण भारत के लोगों पर हिंदी थोपना बंद करें। उनके बयानों से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। ज़रूरत है कि वे अपने कैडर और बीजेपी नेताओं को इस पर समझाएं।”
भागवत के इस बयान ने देश में भाषाई और सामाजिक सद्भाव पर बहस को फिर से जीवित कर दिया है। एक ओर जहां उनके समर्थक इसे समानता और एकता का संदेश मानते हैं, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिक एजेंडा और असमान व्यवहार पर सवाल के रूप में देख रहा है।
