2017 में ATM से 10,000 रुपये निकालने की असफल कोशिश के मामले में सूरत के एक व्यक्ति को 3.28 लाख रुपये का मुआवज़ा
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: सूरत में स्थित ज़िला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक अहम फैसले में बैंक ऑफ़ बड़ौदा को निर्देश दिया है कि वह एक ग्राहक को कुल 3.28 लाख रुपये का मुआवज़ा अदा करे। यह फैसला लगभग नौ साल बाद आया है, जब ग्राहक के खाते से 10,000 रुपये कट गए थे, जबकि उसे एटीएम से नकद राशि प्राप्त नहीं हुई थी।
26 फरवरी को सुनाए गए इस निर्णय में आयोग ने बैंक को 10,000 रुपये की मूल राशि 9% वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने का आदेश दिया। साथ ही, लंबे समय तक शिकायत का समाधान न करने पर 3.28 लाख रुपये का मुआवज़ा देने को कहा गया। इसके अतिरिक्त, मानसिक पीड़ा के लिए 3,000 रुपये और मुकदमेबाजी के खर्च के रूप में 2,000 रुपये देने का भी निर्देश दिया गया।
यह मामला 18 फरवरी 2017 का है, जब जितेश कुमार गांधी ने स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया के एक एटीएम से 10,000 रुपये निकालने का प्रयास किया। हालांकि, उन्हें न तो नकद राशि मिली और न ही ट्रांज़ैक्शन की रसीद, लेकिन उनके खाते से रकम काट ली गई। इसके बाद उन्होंने कई बार संबंधित बैंकों से संपर्क किया और बैंक ऑफ़ बड़ौदा की डुंभाल शाखा तथा स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया की उधना शाखा के खिलाफ औपचारिक शिकायतें दर्ज कराईं।
बैंक ऑफ़ बड़ौदा ने अपने बचाव में कहा कि एटीएम स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया का था और ट्रांज़ैक्शन सफल के रूप में दर्ज हुआ था। हालांकि, आयोग ने पाया कि बैंक यह साबित करने में असफल रहा कि ग्राहक को वास्तव में नकद राशि प्राप्त हुई थी।
अपने आदेश में आयोग ने स्पष्ट किया कि बैंकों के बीच की आंतरिक प्रक्रियाओं या व्यवस्थाओं से ग्राहक का कोई संबंध नहीं है। ऐसे मामलों में यह जिम्मेदारी बैंकों की होती है कि वे ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत करें।
साथ ही, भारतीय रिज़र्व बैंक के नियमों का हवाला देते हुए आयोग ने कहा कि विवादित एटीएम ट्रांज़ैक्शन की राशि निर्धारित समय-सीमा के भीतर ग्राहक को वापस की जानी चाहिए, जिसका इस मामले में पालन नहीं किया गया।
