सूर्यकुमार यादव की T20I गिरावट: फॉर्म नहीं, बल्कि हालात भी सवालों के घेरे में
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: धर्मशाला में रविवार को एक और पारी खत्म हुई, और उसके साथ ही एक और आंकड़ा और भारी हो गया। सूर्यकुमार यादव अब लगातार 21 T20I मैच बिना फिफ्टी के खेल चुके हैं। जिस बल्लेबाज़ ने कभी इंटरनेशनल क्रिकेट में रन बनाना आसान बना दिया था, उसके लिए यह आंकड़ा अब सिर्फ़ नंबर नहीं, बल्कि चेतावनी बन चुका है।
अब इससे बचा नहीं जा सकता—सूर्यकुमार यादव आउट ऑफ फॉर्म हैं। यह गिरावट रातों-रात नहीं आई। 2024 की शुरुआत से ही उनके रन कम होने लगे थे, लेकिन उनका ऊँचा स्ट्राइक रेट इस सच्चाई को ढकता रहा। एक ऐसे बल्लेबाज़ के लिए जो स्वभाव से आक्रामक है, यह स्वीकार्य भी था। वह अभी भी गेंद को साफ़ मार रहे थे, छोटे समय में मैच पर असर डाल रहे थे।
लेकिन 2025 की कहानी अलग है। इस साल खेले गए 20 T20I मैचों में सूर्यकुमार का औसत 14 और स्ट्राइक रेट 125 रहा है। इतने कमजोर आंकड़े देखने के लिए लगभग एक दशक पीछे जाना होगा, उस दौर में जब उनका इंटरनेशनल करियर आकार ले रहा था।
कप्तान का भरोसा, खिलाड़ी का आत्मविश्वास
इन सबके बावजूद, रविवार के मैच के बाद भारतीय कप्तान ने ज़ोर देकर कहा कि सूर्यकुमार आउट ऑफ फॉर्म नहीं हैं। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ तीसरे T20I के बाद सूर्यकुमार ने कहा, “मैं नेट्स में बहुत अच्छी बैटिंग कर रहा हूं। जो मेरे कंट्रोल में है, मैं वह कर रहा हूं। जब रन आने होंगे, ज़रूर आएंगे। आउट ऑफ फॉर्म नहीं हूं, लेकिन रन नहीं बन रहे हैं।”
यह सोच उनके लिए नई नहीं है। IPL 2025 से पहले इंग्लैंड के खिलाफ वह लगातार दो बार शून्य पर आउट हुए थे। तब भी शोर मचा था, लेकिन IPL में उन्होंने ज़बरदस्त वापसी की—168 के स्ट्राइक रेट से 700 से ज़्यादा रन। घरेलू क्रिकेट ने उन्हें फिर लय दी। लेकिन T20I की परिस्थितियाँ अलग हैं T20I में वापसी करना कहीं ज़्यादा मुश्किल है, खासकर मौजूदा टीम संरचना में।
पिछले एक साल में भारत का बैटिंग स्ट्रक्चर बदला है। जब संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा ओपनिंग कर रहे थे, तब भारत आज़ादी से खेल रहा था। पावरप्ले अराजक लेकिन असरदार थे, और दबाव शायद ही कभी मिडिल ऑर्डर तक पहुंचता था।
एशिया कप से पहले यह बदला। शुभमन गिल की वापसी हुई, संजू सैमसन नीचे खिसके और फिर टीम से बाहर हो गए। शुरुआतें सुरक्षित हो गईं, लेकिन धीमी भी। जो दबाव पहले टॉप ऑर्डर झेलता था, वह अब अक्सर सूर्यकुमार के क्रीज़ पर आने तक बचा रहता है।
धर्मशाला में दिखा संघर्ष
रविवार को यह संघर्ष साफ़ दिखा। लुंगी एनगिडी के खिलाफ कुछ गेंदें खेलने के बाद सूर्यकुमार ने खुलकर खेलने का फैसला किया। मिड ऑफ के ऊपर से फ्लैट बैट चौका, फिर अगली गेंद पर पुल शॉट—कुछ पलों के लिए पुराना सूर्या लौटता दिखा।
लेकिन आत्मविश्वास ज्यादा देर नहीं टिका। फाइन लेग के ऊपर अपना जाना-पहचाना क्लिप शॉट खेलने की कोशिश में गेंद सीधे फील्डर के हाथों में चली गई। एक और शुरुआत, फिर अधूरी।
पीक से तुलना या वर्तमान की सच्चाई?
यह सूर्यकुमार यादव का सबसे लंबा फिफ्टी-रहित T20I दौर है। लेकिन शायद समस्या यही है—उनके वर्तमान को उनके अतीत के पीक से लगातार तौला जा रहा है।
वह पीक सिर्फ अच्छा नहीं था, बल्कि T20 क्रिकेट के सबसे महान पीक्स में से एक था। हर बार उसी संस्करण से तुलना करना मौजूदा संघर्ष को और भारी बना देता है।
कुछ का मानना है कि कप्तानी का बोझ असर डाल रहा है। कुछ कहते हैं कि बार-बार रोल और पोजीशन बदलने से लय टूटी है। दोनों दलीलों में सच्चाई है। फर्क बस इतना है कि कप्तान के तौर पर सूर्यकुमार के पास कम से कम एक समस्या को ठीक करने की ताकत भी है—लेकिन उन्होंने अब तक ऐसा नहीं किया।
वर्सेटिलिटी: ताकत या परीक्षा?
वर्सेटिलिटी हमेशा से सूर्यकुमार यादव की सबसे बड़ी ताकत रही है। अब वही उनकी सबसे बड़ी परीक्षा बनती दिख रही है।
इस गिरावट को दो नज़रियों से देखा जा सकता है, या तो यह तब तक छिपी रही जब तक टॉप ऑर्डर, खासकर अभिषेक शर्मा, शुरुआती ओवरों में मैच पलटते रहे। या फिर यह अब टीम के प्रदर्शन में साफ़ दिखने लगी है।
धर्मशाला में आंकड़े खुद कहानी कहते हैं। अभिषेक शर्मा के रहते पहले 5 ओवर में 60 रन। उनके आउट होने के बाद अगले 10 ओवर में फिर सिर्फ 60 रन।
