T20 वर्ल्ड कप: सुनील गावस्कर ने सुपर 8 फॉर्मेट को लेकर ICC का किया बचाव
चिरौरी न्यूज
नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) टी-20 विश्व कप 2026 के सुपर-8 चरण के लिए समूहों की घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना का सामना कर रही है। प्री-सीडिंग प्रणाली के तहत चारों समूह विजेताओं को एक ही पूल में रखा गया, जबकि उपविजेता टीमों को दूसरे समूह में शामिल किया गया। इस व्यवस्था के कारण बेहतरीन प्रदर्शन करने वाली टीमें तथाकथित ‘ग्रुप ऑफ डेथ’ में पहुंच गई हैं, जबकि दूसरे स्थान पर रहने वाली टीमों को अपेक्षाकृत आसान राह मिलती दिखाई दे रही है।
इस विवाद के बीच भारतीय क्रिकेट के दिग्गज सुनील गावस्कर ने इस मुद्दे पर अपनी स्पष्ट राय रखी है। उन्होंने कहा कि अब इस विषय को उठाने का कोई औचित्य नहीं है।
इंडिया टुडे से बातचीत में उन्होंने कहा, “अब यह मुद्दा क्यों उठाया जा रहा है? टूर्नामेंट शुरू होने से पहले यह सवाल क्यों नहीं पूछा गया? जो लोग अब आपत्ति जता रहे हैं, उनसे यह प्रश्न किया जाना चाहिए।”
सुनील गावस्कर ने आईसीसी के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि टूर्नामेंट दो देशों में आयोजित हो रहा है, ऐसे में यात्रा, आव्रजन, कस्टम और अन्य व्यवस्थाओं को ध्यान में रखना आवश्यक था।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय यात्रा, वीज़ा प्रक्रियाएं, एयरलाइन बुकिंग और होटल आरक्षण जैसी जटिलताओं को देखते हुए प्री-सीडिंग का निर्णय लिया गया होगा। हर टीम के साथ जाने वाले सहयोगी स्टाफ की संख्या अलग-अलग होती है—कुछ टीमें 35-40 कमरों की जरूरत रखती हैं, जबकि कुछ को कम कमरों की आवश्यकता होती है। इन सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही आईसीसी ने यह व्यवस्था लागू की होगी।
क्या है सुपर-8 प्री-सीडिंग विवाद?
टी-20 विश्व कप 2026 में सुपर-8 के लिए समूह निर्धारण वास्तविक ग्रुप चरण के प्रदर्शन के बजाय टूर्नामेंट पूर्व रैंकिंग के आधार पर किया गया। इसके परिणामस्वरूप चारों ग्रुप विजेता, भारत, जिम्बाब्वे, वेस्टइंडीज और दक्षिण अफ्रीका, को ग्रुप-1 में रखा गया, जबकि पाकिस्तान, श्रीलंका, इंग्लैंड और न्यूजीलैंड जैसे उपविजेता ग्रुप-2 में शामिल हैं।
आलोचकों का कहना है कि यह प्रणाली “श्रेष्ठता को दंडित” करती है, क्योंकि शीर्ष प्रदर्शन करने वाली टीमें एक-दूसरे को शुरुआती दौर में ही बाहर कर देंगी। वहीं, दूसरे स्थान पर रहने वाली टीमों को सेमीफाइनल तक पहुंचने का अपेक्षाकृत आसान मार्ग मिल सकता है।
हालांकि आईसीसी का तर्क है कि प्रसारण अधिकारों, यात्रा योजनाओं, स्टेडियम आवंटन और प्राइम-टाइम मुकाबलों की अग्रिम योजना सुनिश्चित करने के लिए यह निर्णय आवश्यक था।
सोशल मीडिया पर जारी बहस के बीच सुनील गावस्कर का मानना है कि अब इस पर विवाद खड़ा करना व्यर्थ है, क्योंकि प्रारूप पहले से घोषित था। उनका संकेत साफ है, नियमों की जानकारी पहले से थी, इसलिए बाद में आपत्ति उठाना उचित नहीं।
टी-20 विश्व कप 2026 के सुपर-8 चरण में अब मुकाबले और भी रोमांचक होने की उम्मीद है, क्योंकि एक ही समूह में कई मजबूत टीमें आमने-सामने होंगी। क्रिकेट प्रेमियों की नजरें इस ‘ग्रुप ऑफ डेथ’ पर टिकी रहेंगी, जहां हर मैच नॉकआउट जैसा महत्व रखेगा।
