भूख की पीड़ा समझे बिना भुखमरी मिटाना असंभव

निशिकांत ठाकुर यही तो हमारा संस्कार, हमारी संस्कृति, परंपरा रही है कि समाज का कोई भी व्यक्ति भूखा न रहने

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